सोचिए… एक ऐसी चमचमाती दुनिया, जहां प्राइवेट जेट्स उतरते हैं, अरबों के सौदे होते हैं, दुनिया को दिशा देने वाले उद्योगपति, नेता और प्रभावशाली चेहरे एक ही छत के नीचे जमा होते हैं। चारों तरफ ऐशो-आराम, सुरक्षा और गोपनीयता की ऐसी दीवारें कि बाहर की दुनिया झांक भी न सके। लेकिन इसी चमकदार दुनिया के भीतर, बंद कमरों में ऐसी चीखें गूंजती थीं जिन्हें सुनकर इंसानियत भी कांप जाए। मासूम बच्चियों की सिसकियां, उनका डर, उनका दर्द… और उन सब पर भारी पड़ती ताकत और पैसे की हंसी। जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी नई फाइलों ने एक बार फिर उसी अंधेरे साम्राज्य का दरवाजा खोल दिया है। अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट द्वारा जारी दस्तावेजों में ऐसे गंभीर और चौंकाने वाले आरोप सामने आए हैं, जिन्होंने दुनिया को हिला कर रख दिया है। एक फाइल के मुताबिक दो विदेशी महिलाओं की मौत यौन संबंधों के दौरान गला घोंटे जाने से हुई। आरोप है कि बाद में एपस्टीन के एक कर्मचारी ने शवों को न्यू मैक्सिको स्थित उसके फार्म हाउस ‘जोरो रैंच’ में दफना दिया।
इस पूरे नेटवर्क में उसकी करीबी सहयोगी गिस्लेन मैक्सवेल की भूमिका भी बताई गई है। सबसे भयावह दावा उस नाबालिग पीड़िता का है जिसने खुद को “ह्यूमन इन्क्यूबेटर” बताया — यानी एक ऐसी मानव मशीन जिसे जबरन गर्भधारण के लिए इस्तेमाल किया गया। ईमेल रिकॉर्ड्स के अनुसार लड़कियों को लंबे समय तक रैंच में बंद रखा जाता था, उनसे जबरन प्रेग्नेंट कराया जाता था और बच्चों के जन्म के बाद उन्हें उनसे अलग कर दिया जाता था। उन बच्चों का क्या हुआ, इसका कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला। एक पीड़िता ने तो इस यातना से तंग आकर आत्महत्या की कोशिश तक की। जांच फाइलों में यह भी सामने आया कि एपस्टीन से जुड़े कई वित्तीय सौदे पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम से नहीं बल्कि बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी के जरिए किए जाते थे, ताकि लेन-देन का कोई स्पष्ट ट्रेल न मिले। वहीं न्याय विभाग को खुद यह स्वीकार करना पड़ा कि फाइलें जारी करते समय भारी लापरवाही हुई। कई पीड़ितों की पहचान, तस्वीरें और यहां तक कि नाबालिगों के फोन नंबर तक सार्वजनिक दस्तावेजों में रह गए, जिन्हें काले निशान से छिपाया जाना था।
दस्तावेजों में रेडियो होस्ट और लेखक ब्रायन बिशप के ईमेल भी सामने आए हैं, जिनमें उन्होंने एपस्टीन से एक ऐसे रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए फंडिंग मांगी थी जिसे उन्होंने क्लोनिंग के करीब बताया। एपस्टीन निवेश को तैयार दिखा, लेकिन खुद सार्वजनिक चेहरा बनने से पीछे हट गया। एक अन्य ईमेल में किसी अज्ञात व्यक्ति ने एपस्टीन को किसी को मारने की अनुमति देने जैसी बात लिखी, हालांकि इस पर एपस्टीन का जवाब स्पष्ट नहीं मिला। जस्टिस डिपार्टमेंट के दस्तावेज बताते हैं कि 1994 से 1997 के बीच गिस्लेन मैक्सवेल ने कई नाबालिग लड़कियों को इस जाल में फंसाया। वह पहले उनसे दोस्ती करती, उनके परिवार और स्कूल के बारे में जानती, उन्हें फिल्म, शॉपिंग या पार्टियों में ले जाती। धीरे-धीरे भरोसा जीतकर वह यौन विषयों को सामान्य बनाती, उनके सामने कपड़े उतारती, और फिर “मसाज” के बहाने एपस्टीन के पास भेजती। कई बार वह खुद भी मौजूद रहती।
एपस्टीन मालिश के दौरान ही शोषण करता और लड़कियों को पैसे देकर चुप रहने का दबाव बनाया जाता, ताकि वे खुद को एहसानमंद और कर्जदार महसूस करें। जारी किए गए डेटा का पैमाना भी चौंकाने वाला है — करीब 30 लाख पेज दस्तावेज, 1.8 लाख तस्वीरें और दो हजार वीडियो। इनमें दुनिया के कई ताकतवर लोगों के नामों का जिक्र है, जिनमें इलॉन मस्क, बिल गेट्स, डोनाल्ड ट्रम्प, प्रिंस एंड्रयू, रिचर्ड ब्रैनसन, सारा फर्ग्यूसन और पीटर मैंडेलसन शामिल बताए गए। हालांकि एजेंसियों ने साफ किया है कि किसी दस्तावेज में नाम आने का मतलब अपराध साबित होना नहीं है। कुछ ईमेल्स में मस्क और एपस्टीन के बीच बातचीत का जिक्र है, जहां कथित तौर पर एपस्टीन के आइलैंड पर “सबसे वाइल्ड पार्टी” के बारे में पूछा गया। वहीं प्रिंस एंड्रयू की कुछ तस्वीरें भी फाइलों में बताई जा रही हैं, जिनमें वे एक महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखते हैं, हालांकि महिला की पहचान स्पष्ट नहीं है। ब्रिटेन में इस मामले की सियासी गूंज भी सुनाई दे रही है। पूर्व राजदूत पीटर मैंडेलसन की तस्वीर सामने आने के बाद प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर दबाव बढ़ा और उन्हें सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ी। इसी बीच फाइलों में भारत के पूर्व उच्चायुक्त वाईके सिन्हा के नाम का भी जिक्र सामने आया, हालांकि किस संदर्भ में — यह स्पष्ट नहीं है और न ही कोई आधिकारिक आरोप लगा है।
इस पूरे कांड की शुरुआत 2005 में फ्लोरिडा से हुई थी, जब एक 14 साल की लड़की की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि मसाज के बहाने बुलाकर उसकी बेटी पर सेक्स का दबाव डाला गया। जांच बढ़ी तो करीब 50 नाबालिग पीड़िताओं की पहचान हुई। एपस्टीन के आलीशान विला, प्राइवेट जेट “लोलिता एक्सप्रेस” और हाई-प्रोफाइल पार्टियों का काला सच धीरे-धीरे सामने आने लगा। लेकिन रसूख इतना था कि 2008 में उसे सिर्फ 13 महीने की सजा हुई, वह भी ऐसी जिसमें दिन में जेल से बाहर जाने की छूट थी। 2019 में दोबारा सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोप में गिरफ्तारी हुई, लेकिन मुकदमे से पहले ही जेल में उसकी मौत हो गई, जिसे आत्महत्या बताया गया। उसकी सहयोगी गिस्लेन मैक्सवेल को 2021 में दोषी ठहराया गया और 20 साल की सजा सुनाई गई।आज भी सवाल बाकी हैं — जबरन गर्भधारण के आरोपों की सच्चाई क्या है? गायब बच्चों का क्या हुआ? क्या सचमुच शव दफनाए गए? और सबसे बड़ा सवाल — क्या ताकतवर नामों का सच कभी पूरी तरह सामने आएगा? क्योंकि यह सिर्फ एक अपराध कथा नहीं… यह उस अंधेरे गठजोड़ की कहानी है जहां पैसा, ताकत और हैवानियत ने मिलकर इंसानियत को सबसे सस्ता बना दिया।







