नीरज पांडे की फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर चल रहे विवाद के बीच उत्तर प्रदेश सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री और अपनी जनता पार्टी के अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने एक बयान देकर सियासी और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने जा रही इस फिल्म को लेकर जहां कुछ लोग विरोध जता रहे हैं, वहीं स्वामी प्रसाद मौर्य ने इसे बेवजह का विवाद बताया है।
उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से ट्वीट करते हुए लिखा कि फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर उन्होंने कहा कि कुछ लोग ब्राह्मणों के अपमान के नाम पर घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं, जबकि फिल्म के नाम से ब्राह्मणों का कोई सीधा संबंध नहीं है।
उन्होंने कहा कि फिल्म में ‘पंडित’ शब्द का भी इस अर्थ में प्रयोग नहीं किया गया है, जैसा आरोप लगाया जा रहा है। यहां तक कि अगर ऐसा मान भी लिया जाए, तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के अनुसार भी ‘पंडित’ का मतलब ब्राह्मण नहीं, बल्कि ‘विद्वान’ होता है। पंडित किसी व्यक्ति का नाम भी हो सकता है।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने आगे कहा कि इस फिल्म के निर्माता-निर्देशक नीरज पांडे और अभिनेता मनोज बाजपेयी स्वयं ब्राह्मण हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि कोई ब्राह्मण, ब्राह्मण समाज का अपमान कैसे कर सकता है? इसे बेवजह का विवाद करार देते हुए कहा कि कुछ लोग सिर्फ माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
फिल्म को लेकर पहले से ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ संगठनों द्वारा विरोध की बात कही जा रही है, तो वहीं स्वामी प्रसाद मौर्य के इस बयान के बाद यह मामला और तूल पकड़ सकता है।







