उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) दलित और पिछड़ा वर्ग के वोटरों को आकर्षित करने की तैयारी में जुट गई है, इसी क्रम में सपा ने कांशीराम जयंती को ‘पीडीए दिवस’ के रूप में मनाने का बड़ा ऐलान किया है, इसके तहत हर जिले में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और पीडीए वर्ग को एकजुट करने की कोशिश की जाएगी।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सभी पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी, पत्र में कहा गया है कि कांशीराम ने मंडल आयोग की रिपोर्ट के समर्थन में आंदोलन खड़ा किया और 1992 में सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के साथ मिलकर बहुजन समाज बनाओ अभियान को तेज किया।
सपा के अनुसार, कांशीराम ने दिसंबर 1993 में मुलायम सिंह यादव की सरकार बनवाई और 6000 से ज्यादा जातियों के लोगों को जोड़कर भाईचारा बढ़ाया, इसी वजह से सपा इस जयंती को पीडीए दिवस के रूप में मनाएगी।
सपा की योजना है कि इस अवसर पर श्रद्धांजलि सभाएं और जिलेवार कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, इसका उद्देश्य पीडीए वर्ग और खासकर दलितों को पार्टी से जोड़ना है, बीते कुछ वर्षों में बसपा की कमजोरी के बाद दलित वोटरों पर सभी राजनीतिक पार्टियों की नजरें हैं, सपा लगातार यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि दलितों के हितों की असली पार्टी वही है।
अखिलेश यादव ने 2024 के चुनाव में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का नारा दिया था, जिसका असर दिखा और सपा ने प्रदेश में 37 लोकसभा सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बन गई, अब विधानसभा चुनाव में भी सपा इसी फॉर्मूले पर जीत की तैयारी कर रही है।







