लखनऊ। समाजवादी पार्टी के विधायक और पूर्व मंत्री ओम प्रकाश सिंह ने शिक्षामित्रों के मानदेय बढ़ाने के सरकार के हालिया ऐलान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे चुनावी कदम बताते हुए सरकार पर शिक्षामित्रों के साथ “ऐतिहासिक अन्याय” करने का आरोप लगाया।
सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए ओम प्रकाश सिंह ने लिखा कि वर्ष 2015 में उनकी सरकार के दौरान शिक्षामित्रों को लगभग 40,000 से 42,000 रुपये तक मानदेय मिल रहा था, जिसे बाद में घटाकर 9,000 रुपये कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अब चुनाव नजदीक आते ही 18,000 रुपये का वादा किया जा रहा है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “क्या उत्तर प्रदेश का शिक्षामित्र अपनी मेहनत की आधी कीमत पाकर खुश हो जाएगा? विज्ञापन की चमक से हकीकत नहीं बदलती। हक छीनकर अहसान जताना कहाँ का न्याय है?” ओम प्रकाश सिंह ने इसे ‘पेड प्रमोशन’ और विज्ञापनों के जरिए मुद्दे को दबाने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों को झुनझुना नहीं, बल्कि सम्मानजनक और स्थायी समाधान चाहिए।
गौरतलब है कि प्रदेश में शिक्षामित्रों के मानदेय का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रहा है। सरकार द्वारा हाल ही में मानदेय बढ़ाने की घोषणा के बाद इस पर सियासत तेज हो गई है।







