घरों में पहुंच रहा सीवर मिला पानी, लोगों की ज़िंदगी से खिलवाड़
लखनऊ। राजधानी में जलकल विभाग की घोर लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। जोन-1 के बाबू अड्डा इलाके में बीते एक हफ्ते से लोगों के घरों में पीने के नलों से सीवर मिला गंदा और बदबूदार पानी आ रहा है। हालात इतने भयावह हैं कि लोग मजबूरी में बोतलबंद पानी खरीदकर पीने को मजबूर हैं।
नल से निकल रहा ज़हर, बीमारी का खतरा मंडराया

स्थानीय लोगों का कहना है कि नलों से आ रहा पानी न सिर्फ बदबूदार है, बल्कि उसका रंग भी बदला हुआ है। इस पानी को पीना तो दूर, हाथ धोने तक में डर लग रहा है। बावजूद इसके जलकल विभाग आंखें मूंदे बैठा है।
एक हफ्ते से शिकायतें, समाधान शून्य

क्षेत्रवासियों ने कई बार जलकल विभाग में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक न तो समस्या का समाधान हुआ और न ही किसी अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायज़ा लिया। सवाल यह है कि अगर किसी को बीमारी या बड़ा नुकसान हुआ तो जिम्मेदारी कौन होगा?
पुराने हादसों से भी नहीं लिया सबक
देश पहले भी ऐसे दर्दनाक हादसे देख चुका है।
इंदौर में दूषित पानी पीने से लोगों की मौत हो चुकी है।
लखनऊ के बालू अड्डा इलाके में कुछ साल पहले सीवर मिला पानी पीने से दो मासूम बच्चों की मौत हो गई थी।
उस दौरान सैकड़ों लोग अस्पताल में भर्ती कराए गए थे।
इसके बावजूद जलकल विभाग ने कोई ठोस सबक नहीं लिया।
टैक्स में सख्ती, जनता की सेहत पर लापरवाही

लोगों का आरोप है कि अगर टैक्स जमा न हो तो जलकल विभाग बिना देरी किए पानी और सीवर कनेक्शन काट देता है।
लेकिन जब बात पीने के साफ पानी की आती है, तो वही विभाग महीनों तक सुस्ती दिखाता है।
सवाल उठता है—
कनेक्शन काटने में जितनी तेजी,
समस्या दूर करने में उतनी फुर्ती क्यों नहीं?
स्वास्थ्य संकट की ओर बढ़ता बाबू अड्डा

इलाके में छोटे बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग सबसे ज्यादा खतरे में हैं। दूषित पानी से हैजा, पीलिया, टाइफाइड जैसी बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो हालात विस्फोटक हो सकते हैं।
जिम्मेदार कौन?

एक तरफ जलकल विभाग टैक्स वसूली में सख्त है, दूसरी तरफ लोगों को सीवर का पानी पीने पर मजबूर कर रहा है।
अब बड़ा सवाल यही है—
अगर कोई जनहानि होती है, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी?
बाबू अड्डा क्षेत्र की जनता अब सिर्फ साफ पानी नहीं,जवाबदेही और कार्रवाई चाहती







