मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूल को अपनाने में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। हाल ही में जारी स्टेट्स इलेक्ट्रिसिटी ट्रांज़िशन रिपोर्ट में यूपी को स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ने वाला राज्य बताया गया है।
राज्य सरकार ने वर्ष 2028 तक ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का 1 मिलियन टन लक्ष्य निर्धारित किया है। यह लक्ष्य उत्तर प्रदेश को स्वच्छ ईंधन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य का स्वच्छ और टिकाऊ ईंधन माना जा रहा है, जिससे औद्योगिक और परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम किया जा सकेगा।
उत्तर प्रदेश ने वित्तीय वर्ष 2026-27 तक 22 गीगावॉट (GW) सोलर कैपेसिटी स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। राज्य में बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं, जिससे न केवल ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा बल्कि निवेश और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
उत्तर प्रदेश ने आंध्र प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों के साथ मिलकर ग्रीन टैरिफ और ग्रीन ओपन एक्सेस मैकेनिज्म को लागू करने की दिशा में ठोस नियामक कदम उठाए हैं। इससे उद्योगों और उपभोक्ताओं को हरित ऊर्जा स्रोतों से सीधे बिजली खरीदने का विकल्प मिलेगा, जिससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।
राज्य सरकार ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रोत्साहन के लिए नीतिगत समर्थन दे रही है। इससे उत्तर प्रदेश में ईवी इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ा है।







