Home Uttar Pradesh शाह और मोदी के करीबी पर फूटा योगी का गुस्सा ! सत्ता...

शाह और मोदी के करीबी पर फूटा योगी का गुस्सा ! सत्ता के भीतर मची हलचल !

63
0

मिर्जापुर में जंगल और जल-जंगल-जमीन की हिफाजत की लड़ाई आखिर रंग लाई। करीब 18,300 करोड़ रुपये के अडाणी पावर प्रोजेक्ट पर अब पूरी तरह से ब्रेक लग गया है। जिस प्रोजेक्ट को मोदी-शाह के सबसे करीबी गौतम अडाणी चला रहे थे, उसे योगी सरकार के एक ईमानदार अफसर ने कानून के दम पर रोक दिया है।दरअसल, एनजीटी (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) के सख्त आदेशों के बावजूद अडाणी ग्रुप ने मिर्जापुर के मड़िहान रेंज और 130 गांवों में प्लांट का काम शुरू करा दिया था। बड़ी-बड़ी पाइपें और भारी मशीनें जंगलों के बीच पहुंचाई जा रही थीं। लेकिन जैसे ही वन विभाग को इसकी भनक लगी, रेंजर डीएस नेगी ने मोर्चा संभाल लिया और साफ शब्दों में कह दिया – “जब तक परमिशन नहीं मिलती, कोई काम नहीं होगा।

ALSO READ मोदी-योगी ने बदला पूर्वांचल का चेहरा: जल जीवन मिशन से ग्रामीण इलाकों में आई क्रांतिकारी बदलाव

अब स्थिति ये है कि सड़क किनारे अडाणी ग्रुप की पाइपें और मशीनें धरी रह गई हैं, और कंपनी को इन्हें रखने के लिए अलग गोदाम तलाशने पड़े हैं। पूरे क्षेत्र में कड़ी निगरानी की जा रही है।मड़िहान और ददरी खुर्द गांव के आदिवासी खुलकर सामने आ गए हैं। उनका कहना है –जान दे देंगे, लेकिन जमीन नहीं देंगे।ये वही लोग हैं जिनसे धमकी देकर जबरन जमीनों पर कब्जा किया गया, कागज़ों पर अंगूठे लगवाए गए, और जिनकी आवाज को बार-बार दबाया गया।विंध्य बचाओ आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता लगातार चेताते रहे थे कि इस पावर प्रोजेक्ट से वन्य जीवों का विनाश, पेयजल स्रोतों का संकट और हजारों आदिवासियों का विस्थापन तय है। लेकिन अडाणी ग्रुप ने सरकारी चुप्पी का फायदा उठाकर ज़मीनों पर बाउंड्री वॉल खड़ी कर दी थी।लोगों ने पूछा कि जब एनजीटी की रोक पहले से थी तो काम कैसे शुरू हुआ? किसकी मिलीभगत से बाउंड्री वॉल बनी? और अगर सरकार सब जानती थी, तो कार्रवाई अब क्यों हुई?तो अब जवाब साफ हो गया है –योगीराज में कानून से बड़ा कोई नहीं, चाहे वो अडाणी ही क्यों न हो।अभी तक जो लोग ये मानते थे कि अडाणी पैसे और राजनीतिक रसूख के दम पर कुछ भी करवा सकते हैं, उन्हें अब ये समझ आ गया कि अगर अफसर ईमानदार हो और सरकार की मंशा साफ हो, तो 18 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट भी ठप हो सकता है।

इस प्रकरण का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि गौतम अडाणी, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बेहद करीबी माने जाते हैं, उनके इतने बड़े प्रोजेक्ट को योगी सरकार के मातहत अधिकारी ने रोक दिया। यह सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, एक राजनीतिक संदेश भी है – कि योगी आदित्यनाथ की सत्ता में कानून का राज है, किसी का रसूख नहीं।इससे उन आलोचकों को भी जवाब मिला है जो सवाल कर रहे थे कि “योगीराज में यह काम कैसे शुरू हुआ?” अब जवाब साफ है – काम शुरू हुआ होगा, लेकिन कानून के सामने टिक नहीं सका।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here