सोशल मीडिया पर फिर छिड़ा विवाद
पूर्व मंत्री और अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गए हैं। इस बार मामला दीपावली और माँ लक्ष्मी से जुड़ी उनकी टिप्पणी को लेकर है। सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में मौर्य ने लिखा कि अगर देवी लक्ष्मी से लोगों का भला होता, तो करोड़ों नौजवान बेरोज़गार नहीं घूम रहे होते।
मौर्य का विवादित बयान
मौर्य ने कहा –
“अगर पूजा से सब ठीक होता तो देश में 80 करोड़ लोग पाँच किलो चावल पर जिंदगी ना बिता रहे होते। क्या पाँच-दस किलो चावल खाकर गुज़ारा करने वाले लोग अपने बच्चों को विश्वविद्यालयों में पढ़ा सकते हैं? क्या ऐसे लोग अपने बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफ़ेसर, वकील, आईएएस, आईपीएस या वैज्ञानिक बना सकते हैं? कभी नहीं। आज करोड़ों युवा बेरोज़गार हैं।”
उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।
साधु-संतों और संगठनों की नाराज़गी
स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान पर साधु-संतों ने कड़ी नाराज़गी जताई है।
- विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने मौर्य के इस बयान की निंदा की है।
- वहीं हनुमानगढ़ी के मुख्य पुजारी ने कहा कि “ऐसे लोगों को समाज में रहने का अधिकार नहीं है।”
पहले भी दे चुके हैं विवादित बयान
यह पहली बार नहीं है जब स्वामी प्रसाद मौर्य किसी विवाद में घिरे हों। इससे पहले भी उन्होंने कहा था कि गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस में दलितों और आदिवासियों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है। उस समय भी उनके बयान पर काफी बवाल मचा था।
राजनीतिक हलकों में हलचल
मौर्य के इस नए बयान से राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मच गई है। जहाँ एक ओर कुछ लोग इसे आस्था पर प्रहार मान रहे हैं, वहीं मौर्य के समर्थक इसे सामाजिक असमानता के खिलाफ आवाज़ बता रहे हैं। दीपावली जैसे त्यौहार के समय माँ लक्ष्मी पर दिया गया यह विवादित बयान धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बहस का विषय बन गया है।





