Azam का बेटा भी मुख्यमंत्री बनेगा… इंशाल्लाह, ओवैसी का बयान गरमाया बिहार का चुनावी मैदान

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    बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, राजनीतिक माहौल में गर्मी बढ़ती जा रही है। इसी सिलसिले में बुधवार को गोपालगंज पहुंचे एआईएमआईएम (AIMIM) चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने जनता से सीधे संवाद किया। उन्होंने कहा कि इस बार बिहार को नए नेतृत्व और असली मुद्दों पर सोचने की ज़रूरत है। ओवैसी ने कहा, 6 तारीख मतदान का दिन है। अगर आप विकास चाहते हैं तो इस बार हमारे उम्मीदवार को कामयाब बनाइए। आपने पहले भी मजलिस के उम्मीदवार को समर्थन देकर अपनी बहादुरी दिखाई थी, उसके लिए मैं आपका शुक्रगुज़ार हूं।

    नौजवानों को नौकरी, किसानों को सिंचाई और अस्पताल चाहिए

    ओवैसी ने कहा कि बिहार के युवाओं को रोजगार चाहिए, किसानों को सिंचाई और बिजली की सुविधा चाहिए, और गांवों में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि AIMIM ने अनस सलाम को उम्मीदवार बनाया है जो इन मुद्दों को गहराई से समझते हैं और इनके समाधान के लिए समर्पित हैं। उन्होंने कहा,

    “यह चुनाव नफरत या जात-पात का नहीं, बल्कि काम और विकास का है।

    क्या हमारे समुदाय के बच्चे काबिल नहीं?

    अपने भाषण में ओवैसी ने अल्पसंख्यक समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बिहार में अल्पसंख्यक समुदाय की आबादी 17 फीसदी है, फिर भी टिकट वितरण में उन्हें नज़रअंदाज़ किया जाता है।ओवैसी ने सवाल उठाया,जब 3 प्रतिशत आबादी वाले समूह से कोई उपमुख्यमंत्री बन सकता है तो क्या हमारे समाज के बच्चे काबिल नहीं हैं? क्या किसी मुस्लिम का बेटा मुख्यमंत्री नहीं बन सकता?

    मल्लाह का बेटा उपमुख्यमंत्री बना तो आजम का बेटा भी मुख्यमंत्री बनेगा, इंशाल्लाह

    ओवैसी ने वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी का उदाहरण देते हुए कहा, हम मुकेश सहनी और उनके समाज को सलाम करते हैं कि वो तीन फीसदी होकर भी उपमुख्यमंत्री बने। उन्होंने यह पैग़ाम दिया है कि अगर मल्लाह का बेटा डिप्टी सीएम बन सकता है तो आजम का बेटा भी मुख्यमंत्री बनेगा इंशाल्लाह उन्होंने यह भी जोड़ा कि AIMIM ने पहले गठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई थी, लेकिन किसी ने उन्हें साथ नहीं लिया। अब पार्टी अपनी राह खुद तय कर रही है और जनता के असली मुद्दों पर चुनाव लड़ रही है।

    गरीबी और भेदभाव के खिलाफ अब आवाज उठानी होगी

    ओवैसी ने कहा कि बिहार में आज भी अल्पसंख्यक समुदाय, विशेष रूप से मुसलमान, गरीबी रेखा के नीचे जीवन बिता रहे हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ उन्हें पूरी तरह नहीं मिल पा रहा।उन्होंने कहा, “कुछ पार्टियां खुलकर भेदभाव कर रही हैं, टिकट बांटने में पारदर्शिता नहीं है। हमें यह व्यवस्था बदलनी होगी और अपने हक के लिए एकजुट होकर आवाज उठानी होगी।

    पतंग पर बटन दबाकर अपने भविष्य का फैसला करें

    अपने भाषण के अंत में ओवैसी ने जनता से अपील की मोदी, नीतीश और बाकी नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जमीन पर गरीबों और किसानों को कुछ नहीं मिलता। इसलिए 6 तारीख को पतंग निशान पर बटन दबाइए, ताकि आपकी आवाज विधानसभा तक पहुंचे और आपका भविष्य आपके हाथ में रहे।

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