उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल की राजनीति इन दिनों तीखी बयानबाज़ी के दौर से गुजर रही है, पूर्व सांसद धनंजय सिंह और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच जारी जुबानी जंग अब नए मोड़ पर पहुंच गई है, इस राजनीतिक विवाद में भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की एंट्री ने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है।
अखिलेश यादव को दी संयम बरतने की सलाह
एक पॉडकास्ट के दौरान बातचीत में बृजभूषण शरण सिंह ने अखिलेश यादव के बयानों पर प्रतिक्रिया दी, उन्होंने कहा कि विपक्षी नेता होने के नाते अखिलेश यादव को कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है, लेकिन किसी व्यक्ति विशेष पर व्यक्तिगत हमले से बचना चाहिए।
बृजभूषण शरण सिंह ने स्पष्ट कहा कि सिर्फ किसी के साथ फोटो सामने आने से किसी को अपराधी ठहराना उचित नहीं है, यदि ऐसा पैमाना अपनाया जाए, तो देश के कई नेता कानूनी घेरे में आ सकते हैं, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर किसी मामले में ठोस सबूत मौजूद हैं, तो कानून को अपना काम करने देना चाहिए।
अभय सिंह बनाम धनंजय सिंह विवाद पर भी रखी राय
पूर्व सांसद ने विधायक अभय सिंह और धनंजय सिंह के बीच चल रहे आरोप-प्रत्यारोप पर भी अपनी बेबाक राय रखी, उन्होंने दोनों नेताओं को वाणी पर संयम रखने की सलाह देते हुए कहा कि 80 और 90 के दशक का दौर अब बीत चुका है।
बृजभूषण शरण सिंह के अनुसार, आज का उत्तर प्रदेश गैंगवार की राजनीति से आगे बढ़ चुका है, दोनों नेता जनप्रतिनिधि हैं और उनके परिवार व बच्चे हैं, ऐसे में पुरानी बातों को लेकर आपसी टकराव से बचना चाहिए।
एफआईआर के बाद और मुखर हुए अखिलेश यादव
वहीं दूसरी ओर, अखिलेश यादव धनंजय सिंह को लेकर लगातार हमलावर बने हुए हैं, हाल ही में लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी इलाके में रास्ते और दीवार को लेकर हुए विवाद में धनंजय सिंह और उनके सहयोगी विनय सिंह पर एफआईआर दर्ज की गई।
इस मामले पर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा, “इन बातों को छोड़िए, आप लोग बाटी-चोखा खाकर जाइए, अब कोई नहीं धमकाएगा और न ही कोई कार्रवाई होगी।”
जातिगत राजनीति का आरोप
अखिलेश यादव इस पूरे मुद्दे को उठाकर सरकार पर एक विशेष जाति के पक्ष में काम करने का आरोप लगा रहे हैं, उनका कहना है कि कानून-व्यवस्था के मामलों में चयनात्मक कार्रवाई लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है, पूर्वांचल की राजनीति में यह बयानबाज़ी आने वाले समय में और तेज हो सकती है, जहां एक ओर भाजपा नेता संतुलन और संयम की बात कर रहे हैं, वहीं समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को सरकार के खिलाफ बड़े राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के संकेत दे रही है।



