उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरिकों को ऑनलाइन ठगी और साइबर फ्रॉड से सतर्क रहने की सलाह दी, उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में कहीं भी “डिजिटल अरेस्ट” नाम का कोई कानून नहीं है।
सीएम योगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने साइबर अपराध रोकने के लिए ठोस कदम उठाए हैं, अब उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन सक्रिय हैं, जिनमें प्रत्येक पुलिस स्टेशन में साइबर हेल्प डेस्क भी स्थापित किया गया है।
साइबर फ्रॉड से बचने के लिए चेतावनी
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल, व्हाट्सएप या सोशल मीडिया के जरिए लोगों को गिरफ्तार नहीं करती और पैसे नहीं मांगती, उन्होंने नागरिकों से अनुरोध किया कि वे ऑनलाइन अपनी सुरक्षा पर विशेष ध्यान दें और सार्वजनिक रूप से शेयर की गई तस्वीरें, वीडियो या लोकेशन की जानकारी से सतर्क रहें, क्योंकि अपराधी इन्हें निजी जानकारी जुटाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
नागरिकों के लिए सुरक्षा उपाय
- अपनी निजी जानकारी और OTP किसी के साथ साझा न करें।
- साइबर अपराध या ऑनलाइन ठगी की घटनाओं की फौरन रिपोर्ट राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर करें।
- जितनी जल्दी सूचना पुलिस को दी जाएगी, रिकवरी और जांच की संभावना उतनी ही अधिक होगी।
सीएम योगी ने यह अपील साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों के बीच की है, हाल ही में कई ठग कानून प्रवर्तन अधिकारी बनकर भोले-भाले नागरिकों को मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग तस्करी जैसे झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दे रहे थे और “डिजिटल अरेस्ट” का जाल बुन रहे थे।
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि सावधान रहना ही नागरिकों की सबसे बड़ी सुरक्षा है, और सरकार हर स्तर पर साइबर सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।



