मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन की एक बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीण इलाकों के स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को तेजी से नल कनेक्शन से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि बाढ़ और सूखा प्रभावित क्षेत्रों, सांसद आदर्श ग्रामों और अनुसूचित जाति-जनजाति बहुल इलाकों में चल रही योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए और जल जीवन मिशन के बाकी कामों को जल्द पूरा किया जाए।
पानी की गुणवत्ता जांच पर जोर
मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि सभी गांवों में प्रशिक्षित महिलाओं के माध्यम से पानी में आर्सेनिक और बैक्टीरिया की जांच कराई जाए। इसके लिए जरूरी जांच किट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही जल जीवन मिशन के तहत काम कर रही एजेंसियों के साथ किए गए अनुबंधों की समय सीमा दिसंबर 2027 तक बढ़ाने को मंजूरी दी गई।
प्रदेश में पेयजल कनेक्शन की स्थिति
बैठक में बताया गया कि प्रदेश के सभी 75 जिलों के कुल 97,070 गांवों को पाइप से पेयजल आपूर्ति से जोड़ा जा चुका है।
30 नवंबर 2025 तक कुल 2.67 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से लगभग 2.42 करोड़ परिवारों (करीब 91%) को नल कनेक्शन मिल चुका है।
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ग्रामीण इलाकों के 1.16 लाख से ज्यादा स्कूलों में लगभग सभी को और 1.56 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों में से 99 प्रतिशत से अधिक को नल कनेक्शन से कवर किया जा चुका है।
जांच के लिए लैब और प्रशिक्षण
पानी की गुणवत्ता जांच के लिए प्रदेश में एक राज्य स्तरीय और 75 जिला स्तरीय प्रयोगशालाएं काम कर रही हैं। बुंदेलखंड के नौ जिलों में 62 में से 60 जल शोधन संयंत्रों पर लैब चालू हैं। साथ ही, पूरे प्रदेश में करीब पांच लाख ग्रामीण महिलाओं को पानी की जांच और देखरेख के लिए प्रशिक्षित किया जा चुका है।
बैठक में नमामि गंगे विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव, जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक डॉ. राज शेखर सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।



