पूर्वांचल की राजनीति में कुछ नाम ऐसे हैं जिनके लिए चुनाव नहीं लड़े जाते उनके लिए मैदान खाली किया जाता है।ऐसा ही एक नाम है श्यामनारायण सिंह उर्फ विनीत सिंह,जिन्हें लोग ‘कालीन भैया’ और ‘बाहुबली’ के नाम से जानते हैं।विनीत सिंह वह पहले नेता थे जो निर्विरोध एमएलसी चुने गए।कहते हैं उनके खिलाफ कोई खड़ा नहीं हुआ,क्योंकि लोग डरते थे। मार्शल आर्ट में ब्लैक बेल्ट… पहलवानी का शौक…0009 नंबर की लग्जरी गाड़ियाँबड़े लाव-लश्कर
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यह नेता की पहचान नहीं यह “सत्ता के प्रदर्शन” का प्रतीक है।यह वही भाषा है जो पूर्वांचल दशकों से समझता आया है जहाँ वोट से पहले वर्चस्व बोला जाता है।
वाराणसी, चंदौली, मिर्जापुर, सोनभद्र ठाकुर समाज में उनका दबदबा, किसी पार्टी से नहीं,व्यक्तित्व के भय और प्रभाव से बना है। बसपा से शुरुआत,फिर भाजपा की राजनीति ,पार्टी बदली, पर सत्ता का केंद्र वही रहा।जब कोई कहता है —“हम पर कोई आरोप नहीं मिलेगा”,तो सवाल उठता है तो फिर चुनाव निर्विरोध क्यों?डर क्यों? दरबार क्यों? पूर्वांचल में सबसे ज्यादा डर उसी से लगता है जो खुद को ‘बहुत साधारण’ बताता है।विनीत सिंह अपनी जीत का श्रेय राम, मां विंध्यवासिनी, योगी और मोदी को देते हैं।ग्रामीण स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में जल्द नल कनेक्शन लगाने के निर्देश





