आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को शासन और स्वास्थ्य सेवाओं का मजबूत आधार बनाते हुए उत्तर प्रदेश अब तकनीक के जरिए आम जनता को बेहतर, सुलभ और समयबद्ध स्वास्थ्य सुविधाएं देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में लखनऊ में आयोजित ‘एआई इन ट्रांसफॉर्मिंग हेल्थकेयर’ कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के विजन को स्पष्ट किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एआई आज शासन व्यवस्था को रिएक्टिव से प्रोएक्टिव बनाने का सशक्त माध्यम बन रही है। तकनीक जब संवेदना से जुड़ती है, तभी विकास समावेशी बनता है। उन्होंने कहा कि यूपी एआई मिशन के तहत अगले तीन वर्षों में लगभग 2000 करोड़ रुपये के कार्यक्रम लागू किए जाएंगे, जिससे उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के प्रयोग में देश का अग्रणी राज्य बनेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एआई के उपयोग से महामारियों, वेक्टर जनित रोगों और अन्य स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए डेटा आधारित सटीक नीतियां बनाई जा सकेंगी। प्रदेश में मेडिकल डिवाइस पार्क, फार्मा पार्क, मेडिटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, एआई आधारित उद्यमिता केंद्र और लखनऊ को एआई सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 के बाद प्रदेश की स्वास्थ्य संरचना में व्यापक सुधार हुआ है। मेडिकल कॉलेजों की संख्या 40 से बढ़कर 81 हो चुकी है और आईसीयू, ऑक्सीजन प्लांट, डायलिसिस व डिजिटल डायग्नोस्टिक सुविधाएं अब हर जिले में उपलब्ध हैं। टेलीमेडिसिन और वर्चुअल आईसीयू सेवाओं से दूर-दराज के लोगों को भी लाभ मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने ये भी कहा कि तकनीक का सही उपयोग करते हुए सरकार ने डीबीटी, ई-पॉस और डिजिटल ट्रांजेक्शन के माध्यम से योजनाओं में पारदर्शिता लाई है। अंत में उन्होंने जोर देते हुए कहा कि एआई मानव के नियंत्रण में रहनी चाहिए, मानव एआई के अधीन नहीं।



