उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि ‘प्रगति मॉडल’ आज नए भारत की नई कार्यसंस्कृति का मजबूत उदाहरण बन चुका है। यह सिर्फ बड़ी योजनाओं की समीक्षा का मंच नहीं, बल्कि एक ऐसा सिस्टम है, जिससे सरकारी कामकाज तेज़, पारदर्शी और जवाबदेह बना है।लखनऊ में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने बताया कि जब नियत, तकनीक और जवाबदेही एक साथ काम करती हैं, तो नतीजे खुद दिखाई देने लगते हैं। ‘प्रगति’ इसी सोच का परिणाम है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए शुरू किया था। 2014 के बाद इसे पूरे देश में लागू किया गया।
2003 में हुई थी शुरुआत
सीएम योगी ने बताया कि इसकी शुरुआत 2003 में गुजरात में ‘स्वागत’ मॉडल से हुई थी। इसका मकसद जनता की शिकायतों का तेज़ और पारदर्शी समाधान करना था। बाद में यही व्यवस्था राष्ट्रीय स्तर पर ‘प्रगति’ मॉडल के रूप में विकसित हुई।
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सरकारी सिस्टम में आया बड़ा बदलाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘प्रगति’ ने सरकार की कार्यशैली को पूरी तरह बदल दिया है। अब फैसले तेजी से होते हैं, समय और पैसे की बर्बादी कम हुई है और केंद्र व राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल बन पाया है। राष्ट्रीय स्तर पर अब तक 86 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं को गति मिली है। 3162 मामलों में से 2958 मामलों का समाधान किया जा चुका है।
यूपी के लिए बना गेम चेंजर
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ‘प्रगति मॉडल’ ने विकास को नई रफ्तार दी है।
एक्सप्रेस-वे, मेट्रो, रेलवे नेटवर्क, एयरपोर्ट, रैपिड रेल, जलमार्ग और रोपवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट समय पर पूरे हो रहे हैं।
यूपी में चल रही हैं 330 बड़ी परियोजनाएं
वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 10.48 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली 330 बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं।
इनमें से:
- 128 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं
- 202 परियोजनाएं तय समय में तेजी से आगे बढ़ रही हैं
इंटर-डिपार्टमेंट दिक्कतों का समाधान
सीएम योगी ने बताया कि अब अलग-अलग विभागों की अड़चनें प्रगति पोर्टल के जरिए जल्दी सुलझ जाती हैं। प्रदेश के 96% से ज्यादा मामलों का समाधान हो चुका है, जिससे हाईवे, रेलवे, बिजली और टेलीकॉम जैसी परियोजनाएं तेजी से पूरी हो रही हैं मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार और प्रगति मॉडल के कारण उत्तर प्रदेश आज देश के अग्रणी इंफ्रास्ट्रक्चर राज्यों में शामिल हो चुका है।



