योगी सरकार फरवरी महीने से पूरे उत्तर प्रदेश में 100 दिवसीय विशेष टीबी रोगी खोज अभियान शुरू करने जा रही है। इस अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक टीबी मरीजों की पहचान कर उन्हें समय पर इलाज उपलब्ध कराना है।इस बार अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए सांसद, विधायक, पार्षद, ग्राम प्रधान और विभिन्न विभागों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए सभी जिलों के अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
टीबी से होने वाली मौतों में 17% की कमी
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, दिसंबर 2024 से चल रहे सघन टीबी जांच अभियान की वजह से अब तक टीबी मरीजों की संख्या और इससे होने वाली मौतों में करीब 17 प्रतिशत की कमी आई है। इसी सफलता को देखते हुए सरकार ने एक बार फिर फरवरी से नया विशेष अभियान शुरू करने का फैसला लिया है।
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कहां-कहां होगी टीबी की जांच
इस अभियान के तहत टीबी की जांच और जागरूकता पर खास जोर दिया जाएगा—
- बुजुर्गों और गंभीर मरीजों की प्राथमिकता से जांच
- जेलों और मलिन बस्तियों में विशेष स्क्रीनिंग
- फैक्ट्रियों, बस चालकों और कंडक्टरों की जांच
- आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से गांव-गांव तक पहुंच
- सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में टीबी जांच की सुविधा
स्कूल-कॉलेजों में चलेगा जागरूकता अभियान
बच्चों और युवाओं को टीबी के प्रति जागरूक करने के लिए—
- प्राथमिक स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय तक
- निबंध और पोस्टर प्रतियोगिताएं
- जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे
रोजगार के लिए भी मिलेगी मदद
स्वास्थ्य विभाग ने टीबी से ठीक हो रहे मरीजों को रोजगार से जोड़ने के लिए कौशल विकास विभाग को पत्र लिखा है, ताकि मरीजों को ट्रेनिंग देकर आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
अभियान की मुख्य रणनीति
- सामान्य ओपीडी से 5–10% मरीजों को टीबी जांच के लिए रेफर करना
- आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से सैंपल ट्रांसपोर्ट की सुविधा
- एनजीओ, कॉरपोरेट संस्थाओं और विभागों को ‘निक्षय मित्र’ के रूप में जोड़ना



