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‘बॉर्डर’ से शुरुआत, मलयालम सिनेमा में मिली असली पहचान: शरबानी मुखर्जी की अधूरी बॉलीवुड कहानी

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फिल्म ‘बॉर्डर’ से पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस शरबानी मुखर्जी ने इसके बाद ‘मिट्टी’, ‘अंश’, ‘कैसे कहूं कि प्यार है’ और ‘अनजाने’ जैसी कई फिल्मों में काम किया। हालांकि, ये फिल्में उन्हें बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस की लिस्ट में जगह नहीं दिला सकीं।कम लोग जानते हैं कि शरबानी ने भोजपुरी फिल्म ‘धरती कहे पुकार के’ में भी काम किया था, जिसमें उनके साथ अजय देवगन और मनोज तिवारी जैसे बड़े सितारे थे। फिल्म सुपरहिट रही, लेकिन इसके बावजूद शरबानी ने इसके बाद कभी भोजपुरी फिल्मों में काम नहीं किया।

मलयालम फिल्मों से बदली किस्मत

शरबानी मुखर्जी ने मलयालम सिनेमा में फिल्म ‘राकिलीपट्टू’ से डेब्यू किया। इस फिल्म में उनके साथ ज्योतिका और तब्बू जैसी जानी-मानी एक्ट्रेसेस थीं। लेकिन उनके करियर को नई दिशा 2010 में आई फिल्म ‘सूफी परंजा कथा’ से मिली।

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इस फिल्म में शरबानी ने ‘कार्थी’ नाम की एक हिंदू महिला का किरदार निभाया, जो समाज की बंदिशों को तोड़कर एक मुस्लिम युवक के साथ चली जाती है। यह किरदार केपी रामनुन्नी के उपन्यास पर आधारित था। करीब 12 साल बाद शरबानी को ऐसा रोल मिला, जिसे दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों ने खूब सराहा।

आखिरी फिल्म बन गई ‘आत्मकथा’

इसी साल शरबानी मुखर्जी एक और मलयालम फिल्म ‘आत्मकथा’ में नजर आईं। इस फिल्म को केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड्स में स्पेशल जूरी अवॉर्ड समेत कई सम्मान मिले। सबसे हैरानी की बात यह रही कि इतनी सराहना मिलने के बावजूद ‘आत्मकथा’ उनकी आखिरी फिल्म साबित हुई। जब उनका अभिनय चर्चा में था, उसी समय शरबानी मुखर्जी ने बिना किसी घोषणा के फिल्मी दुनिया से दूरी बना ली।

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