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“संतों पर लाठियां चला रहे बड़े अफसर” – शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आरोप

प्रयागराज माघ मेला 2026 में मौनी अमावस्या के दिन संगम क्षेत्र में स्नान को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच टकराव, संतों से दुर्व्यवहार और मारपीट के गंभीर आरोप; स्नान न करने और फिर निर्णय बदलने से बढ़ा विवाद।

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प्रयागराज: माघ मेला 2026 के दौरान मौनी अमावस्या पर संगम क्षेत्र में भारी भीड़ के बीच ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। शंकराचार्य ने मौके पर मौजूद बड़े अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर संतों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट करने का आरोप लगाया है।


संगम क्षेत्र में संतों से दुर्व्यवहार का आरोप

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि प्रशासन की ओर से संतों के साथ अमर्यादित व्यवहार किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद बड़े अधिकारी और पुलिसकर्मी संतों पर हाथ उठा रहे थे। शंकराचार्य के अनुसार, उन्होंने प्रशासन से सहयोग की बात कही थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें संगम क्षेत्र में ही रोक दिया गया।


स्नान न करने का लिया गया था फैसला

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि प्रशासन के रवैये से आहत होकर उन्होंने पहले मौनी अमावस्या पर स्नान न करने का निर्णय लिया था। उन्होंने कहा,

“हमने प्रशासन से साफ कहा था कि हम सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन हमें वहीं रोक दिया गया। ऐसी स्थिति में हमने स्नान न करने का फैसला किया।”


“रोकना है तो रोक लो, स्नान करके रहेंगे” – शंकराचार्य

बाद में शंकराचार्य ने अपने निर्णय में बदलाव करते हुए प्रशासन को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि जब उनसे जुलूस रोकने को कहा गया तो वे लौटने लगे थे, लेकिन उसी दौरान उनके साथ मौजूद संतों के साथ मारपीट शुरू हो गई। उन्होंने कहा,

“हमने पहले तय किया था कि लौट जाएंगे, लेकिन अब फैसला बदल लिया है। अब हम कहीं नहीं जाएंगे और स्नान जरूर करेंगे। अगर रोकना है तो रोक कर दिखा लें।”


ऊपर से आदेश मिलने का आरोप

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने यह भी आरोप लगाया कि यह पूरी कार्रवाई ऊपर से मिले आदेशों के तहत की जा रही है। उन्होंने कहा,

“यह सब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इशारे पर हो रहा होगा। कुम्भ मेले में जिन जिम्मेदारों पर हमने सवाल उठाए थे, संभव है उसी का बदला लिया जा रहा हो या फिर उन्हें खुश करने के लिए अधिकारी हमारा अपमान कर रहे हों।”


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