प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मिले संजय सिंह, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से विपक्षी नेताओं की मुलाकात का सिलसिला लगातार तेज़ होता जा रहा है, समाजवादी पार्टी के नेता माता प्रसाद पांडे के बाद अब आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात की इस दौरान संजय सिंह ने योगी सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।
मीडिया से बातचीत में संजय सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम को सरकार की हठधर्मिता करार दिया।
‘90 साल के बुजुर्ग को जूतों से मारा गया’
संजय सिंह ने कहा कि यह घटना बेहद दुखद, दुर्भाग्यपूर्ण और पीड़ादायक है, उन्होंने आरोप लगाया कि एक 90 वर्षीय बुजुर्ग को पुलिस द्वारा जूतों से मारा गया, वहीं, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य बटुक के साथ भी पुलिस ने चोटी पकड़कर मारपीट की।
उन्होंने कहा, “आप एक शंकराचार्य को स्नान करने से वंचित करते हैं और फिर उनसे शंकराचार्य होने का प्रमाण पत्र मांगते हैं।”
‘एक बाबा की रोटी DM बनाता है’
संजय सिंह ने सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक बाबा हैं जिनकी रोटी DM बनाता है और उनके लिए पूरा शासन-प्रशासन लगा रहता है, जबकि शंकराचार्य के लोगों को घसीट-घसीट कर मारा जा रहा है, उन्होंने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इसलिए निशाने पर हैं क्योंकि वे गौहत्या पर प्रतिबंध की बात करते हैं और अधूरे मंदिर के उद्घाटन का विरोध कर चुके हैं, “यह सरकार खुद को भगवान से भी ऊपर समझने लगी है, यह हिटलरशाही है,” ‘जहां अधिकारियों की गाड़ी जा सकती है, वहां पालकी क्यों नहीं?’
संजय सिंह ने सवाल उठाया कि जहां अधिकारियों की गाड़ियां जा सकती हैं, वहां स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी क्यों नहीं जा सकती, उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन जानबूझकर उनका अपमान करना चाहता था।
उन्होंने कहा कि वहां मौजूद अधिकारी मारपीट कर रहे थे और ऐसा लग रहा था जैसे पहले से तय करके दुर्व्यवहार किया गया हो।
सभी सरकारों की आलोचना करते रहे हैं अविमुक्तेश्वरानंद
आप नेता ने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद समय-समय पर हर सत्तारूढ़ दल की आलोचना करते रहे हैं,उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री उनके चरण छूते हैं तो वे शंकराचार्य होते हैं, लेकिन जब प्रशासन रोकता है तो वही उन्हें मानने से इनकार करता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अधिकारियों से गलती हुई है तो सरकार को इसे स्वीकार कर कार्रवाई करनी चाहिए थी।





