उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के भीतर चल रहा परस्पर असंतोष अब छिपा नहीं रह गया है। जो खींचतान अब तक बंद कमरों और संगठन की बैठकों तक सीमित थी, वह अब मंच और सड़कों पर खुलकर दिखाई देने लगी है।
अयोध्या और महोबा से सामने आए दो अलग-अलग वीडियो ने यह साफ कर दिया है कि यूपी बीजेपी इस वक्त गंभीर अंदरूनी संकट से गुजर रही है, जहां न सरकार का डर दिख रहा है और न ही संगठन की पकड़। अयोध्या में पूर्व विधायक खब्बू तिवारी की माता के तेरहवीं संस्कार का कार्यक्रम चल रहा था। मंच पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। माहौल शोक और श्रद्धांजलि का था, लेकिन अचानक मंच पर ही बीजेपी जिला अध्यक्ष संजीव सिंह और नेता सच्चिदानंद पांडेय के बीच किसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया। देखते ही देखते बहस हाथापाई में बदल गई। वायरल वीडियो में साफ दिखाई देता है कि दोनों नेता एक-दूसरे की कॉलर पकड़कर धक्का-मुक्की कर रहे हैं। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य इस दौरान बेहद असहज नजर आए। सुरक्षाकर्मियों और कार्यकर्ताओं को हस्तक्षेप कर दोनों को अलग करना पड़ा।
इस घटना ने पार्टी की अनुशासनहीनता को सबके सामने ला दिया। इसी तरह का एक और मामला महोबा से सामने आया, जहां जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और चरखारी विधायक बृजभूषण राजपूत के बीच टकराव देखने को मिला। विधायक अपने क्षेत्र में जलकल योजना के तहत काम न होने से नाराज थे। आरोप था कि सड़कें खोद दी गईं, गड्ढे बना दिए गए, लेकिन पानी अब तक नहीं पहुंचा। विवाद इतना बढ़ा कि विधायक के समर्थकों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हो गई, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
इन दोनों घटनाओं ने मिलकर यह संदेश दिया है कि बीजेपी के भीतर असंतोष अब व्यापक रूप ले चुका है। हैरानी की बात यह है कि इन घटनाओं पर अब तक न मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से कोई प्रतिक्रिया आई है और न ही प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की ओर से कोई सख्त संदेश। इस चुप्पी ने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।हालांकि विधायक बृजभूषण राजपूत ने खुलकर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि मंत्रियों को हवा-हवाई बातें बंद करनी होंगी, वरना अंजाम 2024 के लोकसभा चुनाव जैसा ही होगा। उनका कहना है कि जनता पहले ही सबक सिखा चुकी है, लेकिन अब भी जमीन पर काम नहीं हो रहा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की बीजेपी इस वक्त दो ध्रुवों में बंटी नजर आ रही है। न संगठन पूरी तरह प्रभावी दिख रहा है और न ही सरकार की पकड़ मजबूत नजर आ रही है। मंच पर हाथापाई और सड़कों पर झड़पें इस बात का संकेत हैं कि पार्टी के भीतर संतुलन बिगड़ चुका है और आने वाले समय में यह असंतोष बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।


