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माघ मेले से बिना स्नान लौटे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, ओम प्रकाश राजभर की प्रतिक्रिया चर्चा में

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माघ मेले से बिना स्नान लौटे शंकराचार्य, ओम प्रकाश राजभर के बयान से बढ़ा सियासी विवाद

माघ मेले से बिना संगम स्नान किए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के लौटने के बाद यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर जहां शंकराचार्य ने नाराज़गी जाहिर की थी, वहीं अब इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज़ हो गई है।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि माघ मेले में उनके साथ जो व्यवहार हुआ, वह उचित नहीं था, उन्होंने संकेत दिया था कि उन्हें और उनके शिष्यों को अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा।

इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर का एक बार फिर इस मामले पर बड़ा बयान सामने आया है, राजभर ने शंकराचार्य के धरने और बिना स्नान लौटने के मुद्दे को वीआईपी कल्चर से जोड़ते हुए तंज कसा।

राजभर ने कहा, “अरे महाराज, वह वहां रोज नहाते थे। भला कोई साधु इतने दिनों तक बिना स्नान किए कैसे रह सकता है?” जब उनसे संगम में डुबकी न लगाने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने मुहावरे का सहारा लेते हुए कहा, “मन चंगा तो कठौती में गंगा।”

राजभर ने यह भी कहा कि यह पहला मौका नहीं है जब इस मुद्दे को लेकर सवाल उठाए जा रहे हों, इससे पहले भी उन्होंने बयान दिया था कि एक तरफ देश में वीवीआईपी कल्चर खत्म करने की बात होती है, वहीं दूसरी तरफ वीआईपी स्नान की मांग को लेकर अनशन किया जाता है।

इसके साथ ही राजभर ने बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे पर भी कड़ा रुख अपनाया, गौरतलब है कि अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी नियमों के विरोध और शंकराचार्य को पहुंची कथित ठेस को आधार बनाकर इस्तीफा दिया था।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राजभर ने कहा कि नौकरी से इस्तीफा देने के लिए पारिवारिक कारण या गंभीर बीमारी होनी चाहिए। किसी आंदोलन या मुद्दे के समर्थन में इस्तीफा देना “नेतागिरी” है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसी वजह से अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है।

वहीं दूसरी ओर, शंकराचार्य के शिष्यों के साथ कथित मारपीट का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है, इस संबंध में एक अधिवक्ता द्वारा लेटर पिटीशन दाखिल की गई है, जिसमें तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं

  1. दोषी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाए।
  2. पूरे घटनाक्रम की सीबीआई जांच कराई जाए।
  3. भविष्य में शंकराचार्यों के स्नान को लेकर एक स्थायी SOP (प्रोटोकॉल) तैयार किया जाए

फिलहाल यह मामला धार्मिक, प्रशासनिक और राजनीतिक तीनों स्तरों पर गरमाया हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।

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