Home Entertainment ‘अक्यूज्ड’ रिव्यू: गंभीर मुद्दे पर बनी धीमी लेकिन असरदार मनोवैज्ञानिक थ्रिलर

‘अक्यूज्ड’ रिव्यू: गंभीर मुद्दे पर बनी धीमी लेकिन असरदार मनोवैज्ञानिक थ्रिलर

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अक्यूज्ड एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म है, जिसका निर्देशन अनुभूति कश्यप ने किया है। इससे पहले वह डॉक्टर जी जैसी हल्की-फुल्की फिल्म बना चुकी हैं, लेकिन इस बार उन्होंने एक गंभीर और भावनात्मक कहानी को चुना है। फिल्म की शुरुआत से ही इसका गंभीर माहौल महसूस होने लगता है।

कहानी क्या है?

फिल्म की कहानी दो मुख्य किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है। डॉ. गीतिका का रोल कोंकणा सेन शर्मा ने निभाया है और मीरा के किरदार में प्रतिभा रांटा नजर आती हैं।कहानी लंदन में रहने वाली एक सफल डॉक्टर गीतिका से शुरू होती है। उन पर अचानक यौन दुर्व्यवहार का आरोप लग जाता है। इस एक आरोप से उनकी पूरी जिंदगी बदल जाती है। अस्पताल में उनका सम्मान कम हो जाता है, जांच शुरू हो जाती है और सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलने लगती हैं।

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मीरा, जो उनकी पार्टनर है, शुरुआत में उनका साथ देती है। लेकिन जैसे-जैसे हालात बिगड़ते हैं, उसके मन में भी डर और शक पैदा होने लगता है। फिल्म यह नहीं बताती कि आरोप सही है या गलत। बल्कि यह दिखाती है कि ऐसे हालात में मानसिक दबाव और समाज का नजरिया इंसान को अंदर से कैसे तोड़ देता है।

एक्टिंग कैसी है?

कोंकणा सेन शर्मा ने बहुत दमदार काम किया है। उनके चेहरे के भाव, चुप्पी और डर सब कुछ असली लगता है। उन्होंने अपने किरदार को बेहद सच्चाई से निभाया है।प्रतिभा रांटा भी मीरा के रोल में मजबूत दिखती हैं। उनका किरदार भावनाओं के उतार-चढ़ाव से गुजरता है और वह इसे संतुलित तरीके से निभाती हैं।

जांच अधिकारी के रोल में सुकांत गोयल भी अच्छे लगे हैं। उनका किरदार शांत है, लेकिन असर छोड़ता है।

निर्देशन और फिल्म की खासियत

अनुभूति कश्यप ने फिल्म को बहुत सादगी से पेश किया है। कैमरा वर्क सीधा है, बैकग्राउंड म्यूजिक कम है और पूरा फोकस किरदारों की मानसिक स्थिति पर रखा गया है। फिल्म किसी को तुरंत सही या गलत नहीं ठहराती, बल्कि समाज के रवैये को दिखाती है।हालांकि फिल्म की रफ्तार थोड़ी धीमी है, लेकिन यही धीमापन उसकी गंभीरता को बढ़ाता है।

कमजोरियां

फिल्म के कुछ हिस्से एक जैसे लगते हैं, जिससे थोड़ी बोरियत हो सकती है। कहानी ज्यादातर दो किरदारों तक सीमित रहती है, इसलिए बाकी दुनिया ज्यादा नजर नहीं आती। जांच की प्रक्रिया भी पूरी तरह साफ नहीं दिखाई गई है। अंत भी उतना असरदार नहीं लगता, जितनी उम्मीद बनती है।

देखें या नहीं?

अगर आप तेज रफ्तार और ज्यादा ट्विस्ट वाली फिल्म चाहते हैं, तो यह फिल्म आपको धीमी लग सकती है। लेकिन अगर आपको किरदारों पर आधारित, भावनात्मक और सोचने पर मजबूर करने वाली कहानियां पसंद हैं, तो अक्यूज्ड एक बार देखी जा सकती है यह फिल्म दिखाती है कि एक आरोप कैसे किसी इंसान की जिंदगी और रिश्तों को बदल सकता है।

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