उत्तर प्रदेश में एक तरफ जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार जीरो टॉलरेंस और मजबूत लॉ एंड ऑर्डर के बड़े-बड़े दावे कर रही है… लेकिन वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। सवाल ये है कि जब एक कक्षा 6 की मासूम बच्ची ही सुरक्षित नहीं है, तो फिर इन दावों का क्या मतलब रह जाता है?
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प्रतापगढ़ से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक गरीब परिवार की नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म के प्रयास जैसी शर्मनाक घटना होती है… मुकदमा भी दर्ज होता है… लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। इतना ही नहीं, पीड़ित परिवार को धमकियां मिल रही हैं और डर के साये में जीने को मजबूर हैं। और कहानी यहीं खत्म नहीं होती…जब समाजवादी पार्टी के नेता इंजीनियर संदीप विश्वकर्मा ने पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए थाना रानीगंज के इंस्पेक्टर प्रभात कुमार सिंह से फोन पर जानकारी लेनी चाही, तो मदद की जगह उन्हें अभद्र भाषा, गालियां और धमकियां मिलीं। सोचिए… जो न्याय की आवाज उठाए, अगर उसी को पुलिस अपमानित करने लगे तो आम आदमी किसके पास जाए? अब बड़ा सवाल यही है — क्या यही है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का सच? क्या न्याय मांगना भी अब अपराध बन गया है? और क्या इस मासूम को इंसाफ मिलेगा या फिर ये मामला भी फाइलों में दब जाएगा? इसी को लेकर अब समाजवादी पार्टी ने भी बड़ा ऐलान कर दिया है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ी जाएगी।हालाँकि 13 मार्च को हुई इस घटना के बाद दरोगा के गलत आचरण और शिथिल कार्यशैली की वजह से लाइन हाजिर कर दिया गया है लेकिन आरोपी अभी भी गिरफ्त से दूर है






