उत्तराखंड में हाल ही में मतदाता सूची को लेकर भ्रम फैलने के बाद अब चुनाव विभाग ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। राज्य के अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (एसीईओ) विनय कुमार जोगदंडे ने प्रेस वार्ता में बताया कि फिलहाल स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) शुरू नहीं हुआ है। जोगदंडे ने बताया कि राज्य में 2025 की वोटर लिस्ट तैयार करने की प्रक्रिया के तहत सभी नामों को 2003 की मतदाता सूची से मिलाया जा रहा है। जिन लोगों का नाम 2003 की सूची में नहीं है, उनका रिकॉर्ड उनके माता-पिता के विवरण के आधार पर जोड़ा जा रहा है।
इस प्रक्रिया में अब तक करीब 85% मैपिंग पूरी हो चुकी है। हालांकि, देहरादून और उधम सिंह नगर जिलों में प्रगति थोड़ी धीमी है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि यह काम लगातार आगे बढ़ रहा है। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मतदाताओं को आश्वस्त किया कि किसी को भी अपने नाम को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने बताया कि अपने नाम की स्थिति जांचने के लिए मतदाता निम्नलिखित तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं:
अपने बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) से संपर्क करें
भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर जाकर नाम चेक करें
1950 टोल-फ्री नंबर पर कॉल करके जानकारी लें
बूथ लेवल एजेंट मदद कर रहे
जोगदंडे ने यह भी बताया कि राजनीतिक दलों के सहयोग से राज्य में 19,000 से अधिक बूथ लेवल एजेंट नियुक्त किए जा चुके हैं। ये एजेंट घर-घर जाकर मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच और अपडेट करने में मदद कर रहे हैं।
इस तरह चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को अपडेट करने और किसी भी भ्रम को दूर करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।






