दो दशक पुराने चर्चित लखनऊ फायरिंग मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस केस में बृजेश सिंह समेत सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। इस फैसले के साथ ही करीब 22 साल से चल रहे इस मामले का एक महत्वपूर्ण अध्याय खत्म हो गया है।
यह मामला मुख्तार अंसारी और बीजेपी नेता कृष्णानंद राय के बीच लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी से जुड़ा हुआ था। दोनों के बीच की यह अदावत उत्तर प्रदेश के अपराध जगत की सबसे चर्चित रंजिशों में गिनी जाती रही है। दरअसल, यह घटना 13 जनवरी 2004 की है, जब लखनऊ के कैंट थाना क्षेत्र के सदर रेलवे क्रॉसिंग के पास दोनों गुट आमने-सामने आ गए थे। उस समय हालात इतने तनावपूर्ण हो गए थे कि दोनों पक्षों के बीच जमकर फायरिंग शुरू हो गई। इस गोलीबारी से पूरे इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया था।
इस घटना के बाद मुख्तार अंसारी ने कृष्णानंद राय, बृजेश सिंह और अन्य लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास, बलवा और अन्य गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया गया था कि विरोधी गुट ने जान से मारने की नीयत से हमला किया। वहीं, दूसरी ओर कृष्णानंद राय ने भी मुख्तार अंसारी और उनके साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इस तरह यह मामला दोनों पक्षों के बीच क्रॉस केस के रूप में लंबे समय तक अदालत में चलता रहा।
समय के साथ इस केस की सुनवाई अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ती रही। कई बार गवाहों के बयान, सबूतों की जांच और कानूनी दलीलों के चलते इसमें देरी भी हुई। लेकिन आखिरकार अब एमपी-एमएलए कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुना दिया है।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। इसी आधार पर अदालत ने बृजेश सिंह, त्रिभुवन सिंह, सुनील राय, आनंद राय और अजय सिंह उर्फ गुड्डू को बरी कर दिया।






