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यूपी की राजनीति में नई सियासी चिंगारी: शालिनी सिंह बन सकती हैं नोएडा की स्टार कैंडिडेट

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यूपी की सियासत में एक नई सियासी चिंगारी भड़कती दिख रही है। कहा जाता है कि राजनीति में बिना वजह कुछ नहीं होता और जब बड़े नेताओं के परिवार आमने-सामने आएं, तो मुकाबला और दिलचस्प बन जाता है।

इस बार चर्चा में हैं भाजपा के कद्दावर नेता बृजभूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह, जिनके बारे में कयास लगाए जा रहे हैं कि वह नोएडा विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतर सकती हैं, यह वही सीट है, जहां से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह विधायक हैं, अगर ऐसा होता है, तो यह मुकाबला केवल चुनावी नहीं बल्कि सियासी ताकत की परीक्षा भी साबित हो सकता है।

नोएडा विधानसभा सीट का राजनीतिक बैकग्राउंड

नोएडा विधानसभा सीट नए परिसीमन के बाद दादरी से कटकर अस्तित्व में आई है,

  • जातीय समीकरण ब्राह्मण और वैश्‍य वोटों का समीकरण जीत का निर्धारण करेगा।
  • भाजपा का दबदबा: 2012 से अब तक हर चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार विजयी रहे हैं।
  • 2012: महेश कुमार शर्मा ने बहुजन समाज पार्टी के ओमदत्त शर्मा को 27,676 वोटों से हराया।
  • 2017: पंकज सिंह ने समाजवादी पार्टी के सुनील चौधरी को 1,04,016 वोटों के अंतर से हराया।
  • 2022: पंकज सिंह ने फिर सुनील चौधरी को 1,81,513 वोटों के अंतर से हराया।

यह सीट भाजपा का मजबूत गढ़ बन चुकी है और जीत का अंतर हर चुनाव में बढ़ता चला गया है।

शालिनी सिंह की राजनीतिक तैयारी

पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में नोएडा से चुनाव लड़ने की चर्चा में हैं, शालिनी सिंह कवियित्री भी हैं और अपने पिता व भाइयों की तरह सियासी पिच पर उतरने की तैयारी में हैं, उनका मायका और ससुराल दोनों ही राजनीतिक घरानों से जुड़ा है, जिससे उनकी सियासी ताकत और भी मजबूत है, जब उनसे पूछा गया कि क्या वह नोएडा सीट से चुनाव लड़ेंगी, तो उन्होंने कहा “अभी तो यह समझ नहीं आ रहा है कि हमने मन बनाया है या नहीं, लेकिन अगर चुनाव लड़ने की परिस्थितियां बनती हैं तो मना भी नहीं किया है,” इसका मतलब साफ है शालिनी सिंह ने नोएडा विधानसभा से चुनाव लड़ने की संभावना को पूरी तरह से खारिज नहीं किया है।

जातीय समीकरण और चुनावी संभावना

नोएडा विधानसभा सीट ब्राह्मण और वैश्‍य वर्चस्व वाली है।

कुल वोटर: 4,28,000

  • ब्राह्मण: 1,30,000
  • वैश्‍य: 1,10,000
  • मुस्लिम: 70,000
  • गुर्जर: 35,000 निष्कर्ष:
    जीत का समीकरण स्पष्ट है, ब्राह्मण और वैश्‍य वोट जिस तरफ खड़े होंगे, वही इस सीट की तक़दीर तय करेंगे।

क्या पंकज सिंह अपनी सीट छोड़ेंगे?

पंकज सिंह भाजपा से विधायक हैं और दो बार रिकॉर्ड मतों से जीत चुके हैं। उनकी इस बानी बनाई सीट को छोड़ना इतना आसान नहीं होगा, लेकिन शालिनी सिंह के संभावित प्रवेश से राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
अब सवाल यह है क्या शालिनी सिंह राजनीति में कदम रखेंगी?, क्या पंकज सिंह को अपनी सीट छोड़नी पड़ेगी?और क्या इस बार भी भाजपा का दबदबा बरकरार रहेगा, या बदलाव आएगा? नोएडा की राजनीति में यह अब तक का सबसे बड़ा सस्पेंस बन चुका है।

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