जय भीम-जय भीम का नारा लगाने वाले दलित संगठनों और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद रावण की चुप्पी को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि जब एक दलित युवक को सिर्फ अपनी मजदूरी मांगने पर बेरहमी से पीटा गया, तब दलित हक और स्वाभिमान की लड़ाई लड़ने का दावा करने वाले नेता और संगठन आखिर क्यों खामोश हैं?
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दरअसल यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के आदमपुर थाना क्षेत्र के ढवारसी गांव का है। यहां सचिन नाम का एक दलित युवक नौशाद, हसीन खान और समुद्दीन के यहां मजदूरी करता था। जब उसने अपने काम के पैसे मांगे तो बात इतनी बढ़ गई कि तीनों आरोपियों ने मिलकर उसके साथ बर्बरता की हदें पार कर दीं।बताया जा रहा है कि सचिन के साथ न सिर्फ मारपीट की गई बल्कि उसे अपमानित भी किया गया। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि तीन लोग उसे पकड़कर पीट रहे हैं, उसके कपड़े फाड़ दिए गए और गालियां दी जा रही हैं। आरोप यह भी है कि इस दौरान जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिससे मामला और गंभीर हो गया। वीडियो सामने आने के बाद लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है और सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। पीड़ित सचिन ने हिम्मत दिखाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए नौशाद, हसीन खान और समुद्दीन के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज और SC/ST एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। तीनों आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।लेकिन इस घटना के बाद एक बहस भी छिड़ गई है – क्या दलित उत्पीड़न के मामलों में आवाज उठाने वाले संगठन हर घटना पर समान रूप से सक्रिय होते हैं या फिर कुछ मामलों में उनकी प्रतिक्रिया अलग होती है? यह सवाल अब चर्चा का विषय बना हुआ है।फिलहाल पीड़ित परिवार को न्याय का इंतजार है और लोगों की नजर इस बात पर भी है कि इस मामले में आगे कौन-कौन आवाज उठाता है और प्रशासन कितनी सख्ती दिखाता है।






