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पासी समाज के सम्मान में योगी उतरे मैदान! विरोधियों के उड़े होश! गाजी के नाम मचा बवाल?

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कहते हैं इतिहास को भूलाने की कोशिश भले की जाए… लेकिन जब इतिहास जागता है तो सियासत की दिशा बदल देता है। और इस वक्त उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक ऐसा ही इतिहास फिर से जिंदा किया जा रहा है… पासी समाज के उन वीर योद्धाओं का इतिहास… जिन्हें कभी भुला दिया गया था। जहां पहले देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पासी समाज के गौरवशाली इतिहास का जिक्र किया था… वहीं अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुलकर खुद मैदान में उतर आए हैं… और उन्होंने साफ संदेश दे दिया है कि जिन वीरों ने देश और धर्म की रक्षा की… उन्हें अब भुलाया नहीं जाएगा।एक तरफ जहां आज बीजेपी अपना स्थापना दिवस मना रही है ,,,वही दूसरी तरफ योगी पासी समाज के ऊपर दिया गया बयान सुर्खिया बटोर रहा है योगी का यह भाषण सिर्फ एक भाषण नहीं था… बल्कि 2027 के चुनाव से पहले एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है।

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राजनीति में कहा जाता है कि जब योगी आदित्यनाथ बोलते हैं तो उनके शब्द सिर्फ भाषण नहीं होते… वो एक संदेश होते हैं… एक दिशा होती है… और इस बार योगी का संदेश था ,पासी समाज के सम्मान का।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पासी समाज के वीर योद्धाओं को याद करते हुए कहा कि अगर ये वीर योद्धा नहीं होते तो भारत का इतिहास शायद कुछ और होता। योगी ने कहा कि पासी समाज ने हमेशा राष्ट्र रक्षा, संस्कृति रक्षा और समाज की एकता के लिए बलिदान दिया है… लेकिन दुर्भाग्य से उनके योगदान को उतनी पहचान नहीं मिली जितनी मिलनी चाहिए थी। दरअसल पिछले कुछ समय से पासी समाज के कई संगठन यह कहते रहे हैं कि उन्हें सिर्फ दलित पहचान तक सीमित कर दिया गया… जबकि उनका इतिहास एक योद्धा समाज का रहा है… एक मार्शल कौम का रहा है। समाज के लोग कहते रहे हैं कि हमारे पूर्वजों ने युद्ध लड़े… बलिदान दिए… इतिहास बनाया… लेकिन उन्हें सिर्फ वोट बैंक की राजनीति में बांध दिया गया। इसी मुद्दे को छूते हुए योगी आदित्यनाथ ने बिजली पासी… ऊदा देवी पासी और कई अन्य वीर योद्धाओं का नाम लिया और कहा कि नई पीढ़ी को इनके बारे में बताया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने खास तौर पर महाराजा सुहेलदेव का जिक्र किया… और उनके शौर्य की कहानी सुनाते हुए कहा कि करीब एक हजार साल पहले जब विदेशी आक्रांता सालार मसूद भारत की संस्कृति को नुकसान पहुंचाने आया था… तब महाराजा सुहेलदेव ने उसे करारा जवाब दिया था। योगी ने कहा कि उस समय महाराजा सुहेलदेव ने न केवल आक्रमण को रोका बल्कि ऐसा सबक सिखाया कि लंबे समय तक कोई भारत की तरफ आंख उठाने की हिम्मत नहीं कर सका। इसके बाद योगी आदित्यनाथ ने पिछली सरकारों पर भी बिना नाम लिए निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति ने असली नायकों को पीछे कर दिया और आक्रांताओं को आगे कर दिया। योगी ने कहा कि एक समय था जब जिस जगह सुहेलदेव ने मसूद को हराया था… वहां मसूद के नाम पर मेला लगता था… और असली रक्षक को भुला दिया गया था। लेकिन अब समय बदल चुका है। योगी ने कहा कि अब लोग असली नायकों को पहचान रहे हैं… अब लोग आक्रांताओं के नाम पर नहीं बल्कि अपने वीरों के नाम पर गर्व कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बहराइच की चित्तौरा झील के किनारे अब महाराजा सुहेलदेव का भव्य स्मारक बन चुका है… जहां 40 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा लगाई गई है… और यह स्मारक आज गौरव का प्रतीक बन चुका है। योगी ने यह भी कहा कि सरकार ने फैसला लिया है कि महाराजा सुहेलदेव… वीरांगना अवंतीबाई… ऊदा देवी… और बिजली पासी जैसे नायकों पर लघु नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रम बनाए जाएंगे ताकि नई पीढ़ी को असली इतिहास बताया जा सके। योगी ने साफ कहा कि भारत की संस्कृति को रौंदने वालों को कभी सम्मान नहीं मिल सकता… सम्मान सिर्फ उन लोगों को मिलेगा जिन्होंने देश और धर्म के लिए बलिदान दिया।
अब राजनीतिक जानकार इसे 2027 के चुनाव से जोड़कर भी देख रहे हैं। क्योंकि उत्तर प्रदेश में पासी समाज एक बड़ी आबादी है और चुनावी समीकरणों में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या पासी समाज के गौरव को सामने लाने की यह रणनीति बीजेपी को राजनीतिक फायदा दिलाएगी?


क्या यह विपक्ष की सोशल इंजीनियरिंग को तोड़ने की तैयारी है? या फिर यह सिर्फ इतिहास को उसका सम्मान दिलाने की कोशिश है?लेकिन इतना तय है…2027 का चुनाव जैसे जैसे करीब आ रहा है… वैसे वैसे इतिहास… पहचान और सम्मान की राजनीति भी तेज होती जा रही है। और योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर दिखा दिया है… कि राजनीति सिर्फ सत्ता की नहीं… बल्कि समाज के सम्मान की भी होती है। क्योकि कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में जितनी भी सरकारें आईं, उन्होंने पासी समाज के महापुरुषों को उतनी प्रमुखता से याद नहीं किया, जितनी अब भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में देखने को मिल रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी की रणनीति सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं बल्कि समाज के उन भूले-बिसरे वीरों को सामने लाने की भी है, जिन्होंने हिंदू धर्म और देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से प्रदेश में अलग-अलग समाजों के महापुरुषों की विरासत को सामने लाने की कोशिशें तेज हुई हैं। ऐसे कई नाम हैं जिनके बारे में नई पीढ़ी को बहुत कम जानकारी थी, खासकर पासी समाज के उन वीर योद्धाओं के बारे में, जिन्होंने अपनी आन-बान-शान और धर्म की रक्षा के लिए लड़ाइयां लड़ीं।राजनीतिक विश्लेषक यह भी कहते हैं कि जब कोई समाज अपने इतिहास और अपने नायकों को जानने लगता है तो उसकी राजनीतिक सोच भी बदलने लगती है। चर्चा तो यहां तक है कि अगर पासी समाज का हर युवा अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित हो गया, तो अब तक उन्हें सिर्फ एक वोट बैंक मानकर राजनीति करने वालों की पकड़ कमजोर पड़ सकती है।अब देखना यह दिलचस्प होगा कि इतिहास की यह याद दिलाने वाली राजनीति आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की सियासत में क्या नया मोड़ लाती है।

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