रामपुर जिला अस्पताल में एक महिला मरीज की मौत के बाद देर रात जमकर हंगामा देखने को मिला। गुस्साए परिजनों ने डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की।
जानकारी के मुताबिक अजीमनगर क्षेत्र की रहने वाली महिला को गंभीर हालत में जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था। रात करीब 12 बजे के बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीज को तुरंत दवाइयां दी गईं, जिससे कुछ समय के लिए उसकी हालत में सुधार हुआ, लेकिन बाद में फिर उसकी स्थिति बिगड़ने लगी और ऑक्सीजन लेवल (SPO2) लगातार गिरता गया।
डॉक्टरों के अनुसार मरीज की हालत बेहद नाजुक हो गई थी और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत थी, जो जिला अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। ऐसे में परिजनों को मरीज को किसी बड़े अस्पताल में रेफर कराने की सलाह दी गई।
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अस्पताल का दावा है कि परिजनों ने मरीज को रेफर नहीं कराया और इलाज के दौरान ही उसकी मौत हो गई। वहीं, मौत की खबर मिलते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में किया। इस दौरान जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बृजेश चंद्र सक्सेना और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपा सिंह भी मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाकर शांत कराया। अधिकारियों ने मामले की जांच और उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है।
सीएमएस डॉ. बृजेश चंद्र सक्सेना के मुताबिक मरीज की स्थिति पहले से ही गंभीर थी और परिजनों को पोस्टमार्टम कराने की सलाह दी गई थी, ताकि मौत के सही कारणों का पता चल सके। हालांकि परिजन बिना पोस्टमार्टम कराए ही शव को अपने साथ ले गए।
फिलहाल इस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं पुलिस और स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की जांच में जुटे हैं।






