महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान का 131वां संशोधन विधेयक लोकसभा में आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर सका और पास होने से रह गया। इस प्रस्ताव में संसद की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान रखा गया था। बिल पर करीब 21 घंटे तक विस्तृत चर्चा हुई, जिसके बाद मतदान कराया गया। कुल 528 सांसदों ने वोटिंग में हिस्सा लिया, जिनमें 298 ने समर्थन किया जबकि 230 ने विरोध में मतदान किया।

संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट के मुकाबले बिल 54 वोट कम पड़ गया। बिल के पारित न हो पाने पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष की कड़ी आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि यह घटना भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक नकारात्मक अध्याय के रूप में दर्ज होगी। योगी ने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को पारित न होने देना देश की मातृशक्ति के सम्मान के खिलाफ है और इसे महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय बताया। उन्होंने कांग्रेस-नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन पर महिलाओं के प्रति संवेदनहीन रवैया अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि देश की महिलाएं इस पूरे घटनाक्रम को देख रही हैं तथा समय आने पर जवाब देंगी। योगी ने यह भी दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और इस दिशा में प्रयास जारी रहेंगे। इस मुद्दे पर अब देशभर में नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है। जहां विपक्ष इसे अपनी रणनीतिक जीत बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे महिला सशक्तीकरण के खिलाफ कदम करार दे रहा है। आने वाले समय में इस विषय पर सियासी माहौल और गरमाने के संकेत मिल रहे हैं।






