Punjab Bureau of Investigation (PBI) ने बेअदबी (धर्म के अपमान) के मामलों की जांच को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है। इस SOP में धार्मिक मर्यादा के कड़ाई से पालन के साथ-साथ वैधानिक सीमाओं के भीतर जांच पूरी करने और आरोपियों के विशेष प्रबंधन को अनिवार्य किया गया है।

नई गाइडलाइन गुरु ग्रंथ साहिब, गुटका साहिब, बाइबिल, कुरान और भगवद गीता जैसे पवित्र ग्रंथों से जुड़े मामलों पर लागू होगी। PBI के निदेशक एल.के. यादव के हस्ताक्षर से जारी इस SOP में स्पष्ट किया गया है कि जांच का मुख्य उद्देश्य तथ्यों का सही और निष्पक्ष पता लगाना है, साथ ही पंजाब पुलिस के नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है।
SOP के अनुसार, किसी भी बेअदबी की सूचना मिलने पर जांच अधिकारी (IO) और थाना प्रभारी (SHO) को तुरंत मौके पर पहुंचना होगा, वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित करना होगा और संज्ञेय अपराध पाए जाने पर FIR दर्ज करनी होगी। साथ ही घटनास्थल को सुरक्षित करने के लिए ‘डबल परिधि’ बनाकर भीड़ नियंत्रण और साक्ष्यों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
फोरेंसिक जांच को अनिवार्य करते हुए SOP में उच्च-रिज़ॉल्यूशन फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, CCTV फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), टावर डंप और डिजिटल साक्ष्यों के संग्रह पर विशेष जोर दिया गया है। पवित्र वस्तुओं को केवल अधिकृत धार्मिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ही संभाला जाएगा और उनकी पूरी प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण किया जाएगा।
जांच के दौरान अधिकारियों को यह भी निर्धारित करना होगा कि घटना आकस्मिक थी, लापरवाही का परिणाम थी, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी थी या किसी साजिश के तहत की गई थी। सोशल मीडिया गतिविधियों, वित्तीय लेन-देन और यहां तक कि क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन की भी जांच की जाएगी।
किशोरों और मानसिक रूप से बीमार संदिग्धों के मामलों में विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिनके तहत मेडिकल बोर्ड द्वारा अनिवार्य जांच कराई जाएगी। इसके अलावा डीपफेक, मॉर्फ्ड इमेज और आपत्तिजनक ऑनलाइन कंटेंट की निगरानी और हटाने के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
सभी मामलों की निगरानी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी (SSP/पुलिस आयुक्त) द्वारा की जाएगी और समय-समय पर समीक्षा की जाएगी। साथ ही समय पर चार्जशीट दाखिल करना, प्रभावी पैरवी और गवाहों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाएगी। यह SOP Punjab Legislative Assembly द्वारा पारित ‘जागृत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ के बाद 10 अप्रैल को जारी की गई, जिसके बाद 13 अप्रैल को अतिरिक्त निर्देश भी जोड़े गए।




