उत्तर प्रदेश सरकार ने एडेड माध्यमिक स्कूलों में कार्यवाहक प्रधानाचार्यों के वेतन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि जो शिक्षक लंबे समय से कार्यवाहक प्रधानाचार्य के रूप में काम कर रहे हैं, उन्हें नियमित प्रधानाचार्यों की तरह वेतन दिया जाए। इस फैसले से प्रदेश के हजारों शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है।सरकार के सख्त रुख के बाद कई मंडलों में इस आदेश को लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि जल्द ही कार्यवाहक प्रधानाचार्यों को नियमित प्रिंसिपल के बराबर वेतन मिलना शुरू हो सकता है।
सरकार ने दिए जल्द कार्रवाई के निर्देश
प्रदेश सरकार ने सभी मंडलों और शिक्षा अधिकारियों को इस मामले में तुरंत कार्रवाई करने को कहा है। अधिकारियों से कहा गया है कि वे लंबित मामलों को जल्द निपटाएं और पात्र शिक्षकों को लाभ दिलाएं।बीते मंगलवार को आजमगढ़ मंडल में संयुक्त शिक्षा निदेशक ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को निर्देश जारी किए। इसमें कहा गया कि एडेड स्कूलों के प्रबंधन से तुरंत प्रस्ताव मंगाए जाएं, ताकि कार्यवाहक प्रधानाचार्यों के वेतन संबंधी कार्रवाई पूरी की जा सके।सूत्रों के अनुसार, दूसरे मंडलों में भी इसी तरह की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
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हाईकोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी कार्रवाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में महत्वपूर्ण फैसला दिया था। कोर्ट ने “समान कार्य के लिए समान वेतन” के सिद्धांत को लागू करते हुए कहा था कि अगर कोई वरिष्ठ शिक्षक कार्यवाहक प्रधानाचार्य के रूप में काम कर रहा है और उसके हस्ताक्षर प्रमाणित हो चुके हैं, तो उसे तीन महीने बाद से नियमित प्रधानाचार्य के बराबर वेतन दिया जाए।कोर्ट ने यह भी कहा कि यह वेतन तब तक दिया जाए, जब तक नियमित नियुक्ति न हो जाए, शिक्षक सेवानिवृत्त न हो जाए या कोई अन्य वैधानिक स्थिति न आ जाए।इस फैसले के बाद शिक्षकों को उम्मीद जगी थी, लेकिन कई जगह आदेश लागू होने में देरी हो रही थी।
देरी पर सरकार ने दिखाई सख्ती
सरकारी आदेश के बावजूद मंडल और जिला स्तर पर कई मामलों में देरी की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद सरकार ने अधिकारियों को चेतावनी दी है।
सरकार ने संकेत दिए हैं कि अगर आदेश को समय पर लागू नहीं किया गया, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई भी हो सकती है।
इस कदम के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर तेजी देखने को मिल रही है।
प्रदेश के हजारों स्कूलों को मिलेगा फायदा
उत्तर प्रदेश में कुल 4512 एडेड माध्यमिक स्कूल हैं। इनमें से 3500 से ज्यादा स्कूलों में नियमित प्रधानाचार्य नहीं हैं।
इन स्कूलों का संचालन लंबे समय से कार्यवाहक प्रधानाचार्यों के भरोसे चल रहा है। यानी शिक्षक प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी निभा रहे थे, लेकिन उन्हें वेतन शिक्षक पद के अनुसार ही मिल रहा था।
यही वेतन असमानता लंबे समय से विवाद का कारण बनी हुई थी।
शिक्षकों को मिलेगा आर्थिक लाभ
इस फैसले के बाद कार्यवाहक प्रधानाचार्यों को आर्थिक रूप से बड़ा लाभ मिलेगा। नियमित प्रधानाचार्य का वेतन शिक्षक की तुलना में अधिक होता है।
ऐसे में जो शिक्षक वर्षों से अतिरिक्त जिम्मेदारी निभा रहे थे, उन्हें अब उनके काम के अनुसार वेतन मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
इससे न सिर्फ उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि पेशेवर सम्मान भी मिलेगा।
शिक्षक संगठनों ने किया स्वागत
प्रदेश के शिक्षक संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सरकार ने देर से सही, लेकिन सही फैसला लिया है।
संगठनों का मानना है कि इससे हजारों शिक्षकों को न्याय मिलेगा और स्कूलों में काम करने वाले कार्यवाहक प्रधानाचार्यों का मनोबल भी बढ़ेगा।
शिक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का कहना है कि जब जिम्मेदारी के अनुसार वेतन मिलेगा, तो स्कूल प्रशासन भी बेहतर तरीके से चलेगा।
कार्यवाहक प्रधानाचार्य अधिक उत्साह से काम करेंगे और स्कूलों की व्यवस्था मजबूत होगी।
जल्द लागू होने की उम्मीद
सरकार के सख्त रुख और मंडलों में शुरू हुई कार्रवाई को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह आदेश तेजी से लागू होगा।
अब प्रदेश के हजारों कार्यवाहक प्रधानाचार्य नियमित प्रिंसिपल के समान वेतन पाने की उम्मीद कर रहे हैं।






