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उज्जैन में खुदाई के दौरान मिला विशाल शिवलिंग, महाकाल मंदिर परिसर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

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मध्य प्रदेश के Ujjain स्थित प्रसिद्ध Mahakaleshwar Temple से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया है। मंदिर परिसर के पास खुदाई के दौरान एक विशाल शिवलिंग मिलने से पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का माहौल बन गया है।

सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच मिला शिवलिंग

यह घटना उस समय सामने आई, जब आगामी Simhastha Kumbh Mela 2028 की तैयारियों के तहत मंदिर के विस्तार कार्य के लिए खुदाई की जा रही थी। जानकारी के अनुसार, मंदिर के प्रीपेड बूथ के पास भारी मशीनों से भूमि समतलीकरण का काम चल रहा था।इसी दौरान मजदूरों को मिट्टी हटाते समय एक आकृति दिखाई दी, जो शिवलिंग जैसी प्रतीत हुई। इसके बाद तुरंत खुदाई का काम रोक दिया गया और मौके पर अधिकारियों को बुलाया गया।

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प्रशासन ने बरती सावधानी

मंदिर प्रशासन के सहायक प्रशासक आशीष फलवड़िया ने बताया कि खुदाई के दौरान शिवलिंग मिलने के बाद काम को धीमा कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अगर आगे और प्राचीन अवशेष मिलते हैं, तो आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।प्रशासन फिलहाल पूरे मामले में सावधानी बरत रहा है और बिना जांच के किसी भी तरह की छेड़छाड़ से बचा जा रहा है।

बुद्ध पूर्णिमा पर मिला शिवलिंग, श्रद्धालुओं में उत्साह

यह शिवलिंग Buddha Purnima के पावन अवसर पर मिला, जिसे श्रद्धालु एक शुभ संकेत और दैवीय घटना के रूप में देख रहे हैं। जैसे ही इसकी जानकारी फैली, बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचने लगे।श्रद्धालु शिवलिंग के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते नजर आए और कई लोगों ने इसे आस्था का चमत्कार बताया।

पुजारी ने क्या कहा?

मंदिर के पुजारी आकाश शर्मा ने बताया कि जब मंदिर में ‘भस्म आरती’ चल रही थी, उसी समय खुदाई के दौरान शिवलिंग मिला। उन्होंने कहा कि इस दिन शिवलिंग के दर्शन करना बेहद शुभ माना जा रहा है और सभी श्रद्धालु भावनात्मक रूप से इससे जुड़े हुए हैं।

पुरातत्व विभाग को दी गई सूचना

घटना के बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर निर्माण कार्य फिलहाल रोक दिया है और Archaeological Survey of India को इसकी सूचना दे दी गई है।अब पुरातत्व विभाग यह जांच करेगा कि यह शिवलिंग कितना प्राचीन है और इसका ऐतिहासिक महत्व क्या है।

आगे क्या?

फिलहाल प्रशासन और पुरातत्व विभाग की टीम इस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह शिवलिंग कितने समय पुराना है और इससे जुड़ा ऐतिहासिक संदर्भ क्या है।लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आस्था और इतिहास का संगम Ujjain जैसे धार्मिक शहरों में आज भी जीवंत है।

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