बिहार में कानून-व्यवस्था और विकास को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। गुरुवार (30 अप्रैल 2026) को अधिवेशन भवन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सभी जिलों के डीएम, एसपी और डीजीपी के साथ एक अहम बैठक की इस बैठक में अपराध नियंत्रण, उद्योग को बढ़ावा और जनता की समस्याओं के समाधान पर विशेष जोर दिया गया।
क्राइम कंट्रोल के लिए पुलिस को ‘फ्री हैंड’
मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि अपराध पर काबू पाने के लिए पुलिस को पूरी छूट दी जाती है, उन्होंने निर्देश दिया कि हर शिकायत पर तत्काल केस दर्ज किया जाए और तेजी से चार्जशीट दायर कर सजा सुनिश्चित की जाए, खासकर बच्चियों के खिलाफ अपराधों पर उन्होंने कड़ी कार्रवाई के निर्देश देते हुए कहा कि दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिलनी चाहिए।
डायल 112 को मजबूत करने का निर्देश
बैठक में आपातकालीन सेवा को और प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया, मुख्यमंत्री ने कहा कि डायल 112 सिस्टम को मजबूत किया जाए, ताकि आम जनता को तुरंत सहायता मिल सके और पुलिस की प्रतिक्रिया समय में सुधार हो।
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हर जिले में इंडस्ट्री हब बनाने पर जोर
सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर जिले में इंडस्ट्री हब विकसित किए जाएं, उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों से आने वाले उद्योगपतियों को पूरी सुरक्षा और सुविधाएं दी जाएं, इसके लिए एक-एक अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाए, जो निवेशकों की जरूरतों का ध्यान रखे और उन्हें सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए।
जनता की सुनवाई पर फोकस
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक कार्यालय में बैठकर जनता की समस्याएं सुनें और उनका समाधान करें, उन्होंने अपने 27 वर्षों के अनुभव का हवाला देते हुए कहा: “अगर किसी जिले में सही सोच वाले डीएम और एसपी हों, तो 75% समस्याएं अपने आप खत्म हो जाती हैं।”
मुख्य सचिव और DGP का सख्त संदेश
बैठक में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने अधिकारियों से अपनी क्षमता का पूरा उपयोग करने को कहा और बेहतर प्रदर्शन की अपेक्षा जताई, वहीं डीजीपी विनय कुमार ने अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही, उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जो अपराधी लगातार अवैध गतिविधियों में लिप्त हैं, उन्हें पूरी तरह से खत्म किया जाए।
निष्कर्ष
बिहार सरकार की यह बैठक साफ संकेत देती है कि आने वाले समय में अपराध और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी, सम्राट चौधरी के सख्त निर्देशों के बाद अब यह देखना अहम होगा कि जिला स्तर पर इसका कितना असर दिखाई देता है।






