उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों ‘PDA’ यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक का मुद्दा चर्चा के केंद्र में है। Akhilesh Yadav इस फॉर्मूले को एक समावेशी राजनीतिक रणनीति के तौर पर पेश कर रहे हैं, जिसका मकसद वंचित वर्गों को एकजुट कर सत्ता में भागीदारी सुनिश्चित करना बताया जा रहा है। लेकिन जैसे-जैसे यह मॉडल जमीन पर उतर रहा है, इसके भीतर के अंतर्विरोध भी सामने आने लगे हैं। खासकर गैर-यादव पिछड़े वर्ग के बीच असंतोष की आवाज अब खुलकर सामने आने लगी है।
PDA मॉडल पर उठ रहे सवाल
Akhilesh Yadav लगातार यह दावा करते रहे हैं कि समाज के पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है और उनका PDA मॉडल इसी असंतुलन को दूर करने का प्रयास है। हालांकि, इसी दावे को Om Prakash Rajbhar जैसे नेता चुनौती देते नजर आ रहे हैं।
राजभर का कहना है कि बहुजन राजनीति को किसी एक जाति के प्रभुत्व तक सीमित करना उस विचारधारा के साथ अन्याय है। उनका सवाल “क्या बहुजन राजनीति केवल एक जाति के इर्द-गिर्द सिमट गई है?”अब राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर सामाजिक विमर्श का हिस्सा बन चुका है।
हरदोई घटना से तेज हुई बहस
हाल ही में Hardoi में हुए शिल्पी कुशवाहा हत्याकांड के बाद यह मुद्दा और उभरकर सामने आया। घटना के बाद Akhilesh Yadav पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे और सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने मामले को महिला सुरक्षा और सामाजिक न्याय से जोड़ते हुए CBI जांच की मांग भी की।
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हालांकि, इसी दौरान सामने आए एक वीडियो ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया, जिसमें अखिलेश यादव कार्यकर्ताओं के बीच हल्के-फुल्के अंदाज में नजर आए। इस पर Om Prakash Rajbhar ने तीखी प्रतिक्रिया दी और आरोप लगाया कि “अगर पीड़ित किसी खास जाति से होता, तो व्यवहार अलग होता।”
‘वोट हमारा, राज तुम्हारा’—बढ़ता असंतोष
Om Prakash Rajbhar का नारा—“वोट हमारा, राज तुम्हारा”—इस पूरे विवाद का केंद्र बन गया है। यह सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि गैर-यादव पिछड़े वर्ग के भीतर लंबे समय से पनप रहे असंतोष की अभिव्यक्ति माना जा रहा है।
उनका कहना है कि यह वर्ग केवल वोट बैंक बनकर नहीं रहना चाहता, बल्कि सत्ता में बराबर की हिस्सेदारी चाहता है। इसी कारण PDA मॉडल की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होने लगे हैं, खासकर तब जब उसी वर्ग से विरोध की आवाज उठ रही है जिसे यह मॉडल जोड़ने का दावा करता है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप हुए तेज
इस बहस को और धार तब मिली जब Anil Rajbhar ने अखिलेश यादव के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि “कैमरे के सामने संवेदना और बाद में अलग रवैया” अपनाया जाता है।
हालांकि, इन आरोपों पर Akhilesh Yadav की ओर से कोई सीधा जवाब नहीं आया है। वे लगातार सरकार पर हमलावर बने हुए हैं, लेकिन अपने व्यवहार को लेकर उठे सवालों पर चुप्पी साधे हुए हैं।
गैर-यादव पिछड़ा वर्ग बना निर्णायक फैक्टर
उत्तर प्रदेश की राजनीति में गैर-यादव पिछड़े वर्ग की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। लंबे समय तक बिखरा रहा यह वर्ग अब अपनी अलग राजनीतिक पहचान और हिस्सेदारी की मांग कर रहा है।
Om Prakash Rajbhar जैसे नेता इस बदलाव का चेहरा बनकर उभरे हैं, जो केवल विरोध नहीं बल्कि एक वैकल्पिक राजनीतिक विमर्श भी प्रस्तुत कर रहे हैं। उनके बयानों को अब एक व्यापक सामाजिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
आगे क्या?
उत्तर प्रदेश की राजनीति इस समय एक अहम मोड़ पर खड़ी है। एक तरफ Akhilesh Yadav का PDA मॉडल है, जो सामाजिक गठजोड़ की बात करता है, वहीं दूसरी ओर गैर-यादव पिछड़ों की बढ़ती राजनीतिक जागरूकता है, जो समान हिस्सेदारी की मांग कर रही है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि PDA की रणनीति इस चुनौती का सामना कैसे करती है। इतना तय है कि गैर-यादव पिछड़ा राजनीति अब प्रदेश के सत्ता समीकरण को निर्णायक रूप से प्रभावित करने की स्थिति में पहुंच चुकी है।






