एक ऐसा मंदिर जहां मां की आरती पर चमगादड़ करते है मंदिर की परिक्रमा। आप ने बहुत से देवी देवताओं के मंदिर देखे होंगे जिनमे तरह तरह के रूप में देवी देवताओं की मूर्तियाँ होती है, पर क्या आप ने किसी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है, जो चमगादड़ो का मंदिर कहलाता हो, जी हां आइए हम आप को ले कर चलते है, ऐसे ही एक मंदिर में जहाँ लाखो की संख्या में जीवित चमगादड़ निवास करते है, जहाँ लोग इन चमगादड़ो की पूजा कर इनसे अपने लिए वरदान मांगते है ..

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यह है हमीरपुर जिले का प्राचीन चौरा देवी मंदिर है, दो नदियों के बीच के इस स्थान पर कभी घना जंगल हुआ करता था, करीब १५० साल पहले कुछ चरवाहों ने एक पीपल के पेड़ के ताने से खोजी थी एक मूर्ति, वही पत्थर की ये मूर्ति बन गयी श्रधा का केंद्र और लोग इसे चौरा देवी के नाम से पुकारने लगे, वही इसी घने जंगल में मूर्ति के आस पास रहते थे हजारो बडे चमगादड़, इनकी आवाज और लटकने का तरीका है बेहद डरावना था, मंदिरों की घंटियों के साथ इस चमगादड़ो का अपना अलग महत्व है, मंदिर में माँ की आरती के समय में यह चमगादड़ हजारो की संख्या में घंटो की आवाज के साथ ही उड़ने लगते है, और मंदिर की आरती के बाद प्रसाद खा कर यह वापस अपने पेड़ में चले जाते है !

बताते है कि जहाँ चमगादड़ो का वास होता है वहां वीरानी ही रहती है, ये अँधेरे में ठंडी गुफाओ में रहते है पर यहाँ ऐसा कुछ भी नही है, आसमानी डर के नाम से पुकारे जाने वाले इन चमगादड़ओ पर बनी बैटमैन नाम की तीन फिल्मे किसे याद नही है, मंदिर के श्रद्धालु इनेह माता के रक्षक मानते है, तो कुछ लोग इन्हें अच्छी आत्माए भी मानते है, जो माँ की भक्ति में लीन हो कर माँ की पूजा करने के लिए ही आरती में शामिल होते है, और कहा यह भी जाता है की इस मंदिर में हर मुराद पूरी होती है अगर माँ के दर्शन के बाद इन चमगादड़ो के भी दर्शन किये जाये!

विज्ञानं की माने तो यह उल्टे लटकने वाले ये स्तन पायी रात्रि डर तो पैदा करते है पर विज्ञानं के अनुसार ये प्र्श्रव्य (अल्ट्रा सोनिक ) तरंगो को उत्सर्जित करते है, ये राडार की तरह तरंगे पकड़ कर दुश्मनों या भोजन का पता लगा लेते है, ज्यादातर ठंडी जगहों पर या अँधेरी गुफाओ और खंडहरों पर रहते है, लेकिन इन चमगादड़ो की एक पेड़ पर लाखो की संख्या में मौजूदगी चौकाने वाली है, और इन्होने भोजन पाने के लिए ही अपने आप को इस तरह विकसित कर लिया है, की घंटो की धुन के साथ ही यह इस स्थान में पहुच जाते है वो भी दिन में और वो खुद इसे एक माँ के चमत्कार के रूप में देखते है !

एक जनश्रुत्री के अनुसार हजारो वर्ष पहले इस स्थान पर चमगादड़ओ के देवता की मौत हुई थी, उन्हें यही दफनाया गया था, तब से मंदिर के आस पास ही ये घूमते और मंडराते नजर आते है, और करीब ही यमुना नदी का जल पीकर वे अक्सर मंदिर की चौखट में आ जाते है, उसी समाधि की सुरक्षा और श्रधा के चलते चमगादड़ो ने लाखो की संख्या में यह अपना डेरा जमा लिया है, अब ये बात कितनी सही है, ये कहा नही जा सकता पर इतना जरुर है, की सैकडो साल पुराने इस बरगद के विशाल पेड़ पर लटक रहे चमगादड़ो का इसमंदिर में विराजमान माँ चौरा देवी से जरुर कोई न कोई रिश्ता है, जिसके चलते इनकी भक्ति को देखने को बहुत दूर दूर से श्रद्धालु यहां आते है ।






