लखनऊ/जयपुर: उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावी और जवाबदेह बनाने में विधानसभा समितियों की भूमिका बेहद अहम है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि समिति प्रणाली को मजबूत किए बिना लोकतंत्र को पूर्ण रूप से सशक्त नहीं बनाया जा सकता।
जयपुर स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित पीठासीन अधिकारियों की समिति की दूसरी बैठक में अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि सरकार के वादों को जमीन पर उतारने में समितियां महत्वपूर्ण कड़ी का काम करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों की समितियों के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित होना ही सुशासन की असली पहचान है।

श्री महाना ने वर्तमान समय में संसदीय कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जनहित केंद्रित बनाने की जरूरत पर बल दिया। उनके अनुसार, यदि समिति प्रणाली को अधिक सशक्त और परिणामोन्मुख बनाया जाए और उसकी सिफारिशों पर समयबद्ध अमल हो, तो शासन व्यवस्था में व्यापक सुधार संभव है।

इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने की, जिसमें देश के कई राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष शामिल हुए। सतीश महाना ने समितियों को “मिनी सदन” बताते हुए कहा कि यहां विषयों पर गहराई से चर्चा और विश्लेषण संभव होता है, जिससे निर्णय अधिक व्यावहारिक और जनहितकारी बनते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि महत्वपूर्ण विधेयकों को अनिवार्य रूप से समितियों के पास भेजा जाना चाहिए, ताकि उनकी व्यापक समीक्षा हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि समितियां न केवल अधिकारियों के कार्यों की निगरानी करती हैं, बल्कि उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन भी देती हैं और शासन को जवाबदेह बनाए रखती हैं।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने समिति प्रणाली को और मजबूत करने के लिए विशेषज्ञों की भागीदारी, आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, नियमित प्रशिक्षण और पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया। उनका मानना है कि इससे लोकतांत्रिक संस्थाएं और अधिक सशक्त, जवाबदेह और जनकेंद्रित बनेंगी। इस दौरान समिति प्रणाली की समीक्षा, उसकी प्रभावशीलता बढ़ाने और संसदीय प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक से पहले सभी सदस्यों ने राजस्थान विधानसभा भवन और संग्रहालय का भ्रमण किया तथा विभिन्न प्रदर्शनियों और औषधीय पौधशाला का अवलोकन भी किया।
कार्यक्रम में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सभी अतिथियों का पारंपरिक स्वागत किया।






