समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के एक साथ जारी वीडियो पर की गई टिप्पणी के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर दोनों डिप्टी सीएम की एक साथ आई रील ने सियासी हलकों में चर्चा छेड़ दी, जिस पर अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि “दो स्टूल मिलकर कुर्सी नहीं बन सकते।” उनके इस बयान को भाजपा ने सीधे तौर पर चुनौती के रूप में लिया और कई नेताओं ने इसका जवाब दिया।
सबसे पहले केशव प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पलटवार करते हुए लिखा कि एक “हिट और फिट जोड़ी” से अखिलेश यादव का घबराना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि उनकी और ब्रजेश पाठक की जोड़ी आज प्रदेश की जनता के भरोसे और विश्वास की पहचान बन चुकी है। मौर्य ने अपने पोस्ट में ऐतिहासिक और वैचारिक संदर्भ जोड़ते हुए खुद को महान सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य की परंपरा का प्रतिनिधि बताया और कहा कि वे उनके आदर्शों से प्रेरित होकर अखंड भारत के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं। साथ ही उन्होंने भगवान गौतम बुद्ध के संदेशों—शांति, समता और न्याय—का उल्लेख करते हुए विपक्ष पर सामाजिक रूप से पिछड़े और वंचित वर्गों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया।
केशव मौर्य यहीं नहीं रुके, उन्होंने एक अन्य पोस्ट में सपा पर तीखा कटाक्ष करते हुए लिखा कि “लाल टोपी, साइकिल निशान—धक्का-मुक्की जिनकी पहचान” और दावा किया कि 2027 के चुनाव में सपा को सैफई लौटना पड़ेगा। उनके इन बयानों को भाजपा की आक्रामक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें विपक्ष पर लगातार दबाव बनाए रखने की कोशिश झलकती है।
वहीं, दूसरे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी अखिलेश यादव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नए उत्तर प्रदेश की “सुपर जोड़ी” की चर्चा हर जगह हो रही है, जिससे सपा प्रमुख की बेचैनी समझी जा सकती है। उन्होंने केशव मौर्य को अपना परम मित्र और परिवार का सदस्य बताते हुए कहा कि दोनों नेता केवल बातों पर नहीं, बल्कि जमीन पर काम करने में विश्वास रखते हैं। पाठक ने यह भी कहा कि उनके घरों के दरवाजे जनता की सेवा के लिए 24 घंटे खुले रहते हैं। उन्होंने सपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उसकी राजनीति तुष्टीकरण और नकारात्मक सोच पर आधारित है, जबकि जनता अब विकास और सुशासन को प्राथमिकता देती है।
इस पूरे विवाद में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने अखिलेश यादव के बयान को टैग करते हुए लिखा, “कमल से साइकिल है जलती, इस तरह रोने से किस्मत नहीं बदलती।” उन्होंने आगे कहा कि केवल तुष्टीकरण की राजनीति से सत्ता हासिल नहीं की जा सकती और लगातार चुनावी हार के कारण विपक्ष बौखलाहट में इस तरह के बयान दे रहा है।
कुल मिलाकर, एक साधारण सोशल मीडिया रील से शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का बड़ा मुद्दा बन गया है। भाजपा जहां इसे अपनी “डबल इंजन” सरकार और मजबूत नेतृत्व की छवि के रूप में पेश कर रही है, वहीं सपा इसे सत्ता के अंदरूनी समीकरणों और नेतृत्व की खींचतान के रूप में दिखाने की कोशिश कर रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस तरह की बयानबाजी आने वाले समय में और तेज होने की संभावना है, जिससे प्रदेश की राजनीति का तापमान लगातार बढ़ता नजर आ रहा है।






