भारतीय कुश्ती एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। इस बार मामला किसी मुकाबले या मेडल का नहीं, बल्कि सिस्टम और पारदर्शिता पर उठते सवालों का है। ओलंपियन पहलवान Vinesh Phogat ने कुश्ती महासंघ और पूर्व अध्यक्ष Brij Bhushan Sharan Singh को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके बाद खेल जगत में नई बहस छिड़ गई है।
विनेश फोगाट ने खास तौर पर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के आयोजन स्थल को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि साल 2018 से अब तक आयोजित तीन सीनियर नेशनल रैंकिंग कुश्ती प्रतियोगिताएं लगातार गोंडा के नंदिनी नगर में ही कराई गईं। उन्होंने पूछा कि आखिर दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम या लखनऊ के केडी सिंह बाबू स्टेडियम जैसे बड़े और आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को नजरअंदाज क्यों किया गया।
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विनेश ने आरोप लगाया कि नंदिनी नगर में प्रतियोगिता आयोजित होने से निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने दावा किया कि जब वह प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुंचीं तो उन्हें बिना खेले ही वापस लौटना पड़ा। फेडरेशन ने नोटिस का हवाला देते हुए उन्हें प्रतियोगिता से बाहर कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम पर भावुक प्रतिक्रिया देते हुए विनेश ने कहा कि उन्हें वहां खुद को सुरक्षित महसूस नहीं होता।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतियोगिता में कौन रेफरी होगा और किस खिलाड़ी को बढ़त मिलेगी, यह सब पहले से तय रहता है। विनेश का कहना है कि देश के लिए मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को सम्मान देने के बजाय मानसिक दबाव में रखा जा रहा है। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है और कई लोग खेल प्रशासन में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
दूसरी तरफ, Wrestling Federation of India ने इन आरोपों को खारिज किया है। फेडरेशन का कहना है कि इतने बड़े आयोजन के लिए नंदिनी नगर सबसे उपयुक्त जगह थी। उनके मुताबिक यहां करीब 800 पहलवानों के रहने और खाने की व्यवस्था आसानी से हो सकती है। फेडरेशन ने यह भी बताया कि नंदिनी नगर स्पोर्ट्स क्लब में 55 एकड़ का कैंपस, इंटरनेशनल शूटिंग रेंज और ओलंपिक स्तर की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
वहीं Brij Bhushan Sharan Singh का कहना है कि उन्हें कुश्ती से लगाव है और वे चाहते हैं कि उनके क्षेत्र में बड़े खेल आयोजन हों। हालांकि आलोचकों का सवाल है कि जब देश के ज्यादातर शीर्ष पहलवान हरियाणा और आसपास के राज्यों से आते हैं, तो प्रतियोगिताओं को बार-बार एक ही क्षेत्र तक सीमित क्यों रखा जा रहा है।
इस पूरे विवाद ने भारतीय कुश्ती में प्रशासनिक पारदर्शिता, खिलाड़ियों की सुरक्षा और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया को लेकर फिर बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि फेडरेशन इन आरोपों पर क्या कदम उठाता है और क्या खिलाड़ियों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाएगा।






