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बीजेपी को खुला समर्थन और सपा से बगावत के बाद भी खाली हाथ रहीं पूजा पाल, उठे सवाल

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समाजवादी पार्टी से बगावत कर भाजपा के समर्थन में खुलकर सामने आने वाली विधायकों में सबसे ज्यादा चर्चा कौशांबी की चायल विधानसभा सीट से विधायक पूजा पाल के नाम की थी। राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से यह कयास लगाए जा रहे थे कि योगी सरकार के संभावित कैबिनेट विस्तार में पूजा पाल को मंत्री पद मिल सकता है।

लेकिन जब योगी कैबिनेट का विस्तार हुआ तो मंत्री बनाए गए चेहरों में सपा से बगावत करने वालों में केवल मनोज पांडे को जगह मिली, जबकि पूजा पाल का नाम सूची से गायब रहा। इसके बाद राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। दरअसल, सपा से अलग होने के बाद पूजा पाल लगातार अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर हमलावर रहीं। उन्होंने कई मौकों पर योगी सरकार की कानून व्यवस्था की खुलकर तारीफ की। इतना ही नहीं, सदन के भीतर भी सरकार की नीतियों और माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर उन्होंने समर्थन जताया था। उनके तेवरों को देखकर माना जा रहा था कि भाजपा नेतृत्व उन्हें बड़ा राजनीतिक संदेश देने के लिए कैबिनेट में जगह दे सकता है।

पूजा पाल को मंत्री पद न मिलने पर समाजवादी पार्टी ने भी भाजपा पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। सपा नेता आई पी सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि “विश्वासघात का फल अवश्य मिलता है।” उन्होंने यह भी कहा कि “अब बीजेपी का मंत्रिमंडल विस्तार 20 बरस बाद होगा।”

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पूजा पाल को मंत्री पद न मिलना केवल सामान्य राजनीतिक फैसला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके पीछे संगठनात्मक और क्षेत्रीय समीकरण भी अहम वजह हो सकते हैं। चर्चा यह भी है कि कैबिनेट विस्तार में जातीय संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और आगामी चुनावी रणनीति को प्राथमिकता दी गई, जिसके चलते पूजा पाल को फिलहाल इंतजार करना पड़ सकता है।

सियासी गलियारों में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या भाजपा का खुलकर समर्थन करने वाली पूजा पाल अंदरूनी राजनीति और सियासी समीकरणों का शिकार हो गईं।

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