लखनऊ/बेंगलुरु। उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा है कि देश की सभी विधानसभाओं की कार्यप्रणाली और नियमों में समानता लाना समय की जरूरत है, ताकि संसदीय कार्यवाही अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनता के हित में हो सके। उन्होंने बताया कि ओम बिरला की पहल पर गठित उच्च स्तरीय समिति इसी दिशा में काम कर रही है। यह पहल प्रधानमंत्री के “वन नेशन, वन लेजिस्लेटिव प्लेटफॉर्म” के विजन के अनुरूप सभी विधानसभाओं को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास है।

श्री महाना ने कहा कि विधानसभाओं के सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए एक साझा और व्यावहारिक मॉडल तैयार किया जाना जरूरी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि नियमावली में अनावश्यक भिन्नता समाप्त होनी चाहिए और सभी विधानमंडलों के लिए एक जैसी प्रक्रियाएं और नियम बनाए जाने चाहिए।उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के संभावित दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि तकनीक का इस्तेमाल लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने के लिए होना चाहिए, न कि उन्हें प्रभावित करने के लिए। साथ ही उन्होंने कहा कि विधानसभाओं को आम जनता से ज्यादा जुड़ने की जरूरत है, ताकि लोगों को उनकी कार्यप्रणाली और लोकतंत्र में उनकी भूमिका की बेहतर समझ हो सके। इसके लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।

मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए श्री महाना ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सकारात्मक माहौल बनाने में मीडिया का योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने सुझाव दिया कि सभी विधानसभाएं अपने अनुभव और सुझावों के आधार पर एक ड्राफ्ट तैयार करें, जिसे अगली बैठक में अंतिम रूप दिया जा सके। उल्लेखनीय है कि विधानमंडलों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, आधुनिक और एकरूप बनाने के उद्देश्य से कर्नाटक के मैसूर में 12 से 14 मई 2026 तक पीठासीन अधिकारियों की उच्च स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की जा रही है, जिसका उद्घाटन हो चुका है।

इस प्रतिष्ठित समिति में छह राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष शामिल हैं और इसके अध्यक्ष सतीश महाना हैं। अन्य सदस्यों में यू.टी. खादर फरीद, विजेन्द्र गुप्ता, राहुल नार्वेकर, कुलदीप सिंह पठानियां और शेरिंगेन लोंगकुमेर शामिल हैं।मैसूर स्थित साइलेंट शोर रिजॉर्ट में आयोजित इस मंथन सत्र में “विधानसभा निकायों के कार्य संचालन, प्रक्रिया और नियमों का एक समान मॉडल” विषय पर दो दिनों तक गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति डॉ. हरिवंश भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। यह बैठक देश की विधानसभाओं के कामकाज और प्रक्रिया नियमों में बेहतर समन्वय और एकरूपता स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।






