मथुरा में रिश्तों की अनोखी तस्वीर, बहू की सेवा भावना ने जीता दिल
सास-बहू के झगड़ों की कहानियां तो आपने अक्सर सुनी और देखी होंगी, लेकिन उत्तर प्रदेश के Mathura से एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने लोगों को भावुक कर दिया है। यहां एक बहू ने अपनी बुजुर्ग सास की आस्था और इच्छा को पूरा करते हुए “श्रवण कुमार” जैसी मिसाल पेश की है।
85 वर्षीय सास की इच्छा बनी प्रेरणा
कोसी कलां क्षेत्र की रहने वाली 85 वर्षीय चंद्रो देवी की वर्षों पुरानी इच्छा थी कि वह पवित्र बृज 84 कोस परिक्रमा करें। उम्र और कमजोरी के कारण चलने-फिरने में असमर्थ होने पर उनका सपना अधूरा रह जाता, लेकिन उनकी बहू प्रीति चौधरी ने इस जिम्मेदारी को अपने कंधों पर उठा लिया।
टब में बैठाकर कराई 84 कोसी परिक्रमा
प्रीति चौधरी ने अपनी सास को सहारा देते हुए उन्हें टब में बैठाकर पूरी श्रद्धा और सेवा भाव के साथ 84 कोसी परिक्रमा कराई। कठिन और लंबी मानी जाने वाली इस यात्रा में उन्होंने हर कदम पर अपनी सास का साथ निभाया।
रिश्तों की अनोखी मिसाल बनी यह कहानी
जहां आज के समय में सास-बहू के रिश्तों को अक्सर तनाव और विवाद के रूप में दिखाया जाता है, वहीं यह घटना भारतीय संस्कृति के उस स्वरूप को सामने लाती है जिसमें सेवा, सम्मान और समर्पण को सर्वोपरि माना जाता है।
प्रीति चौधरी की यह पहल न सिर्फ एक धार्मिक यात्रा है, बल्कि यह परिवार और संस्कारों की उस गहराई को भी दर्शाती है जो आज भी समाज में जीवित है।
“मां जैसा रिश्ता” बना संदेश
प्रीति चौधरी ने यह साबित किया कि सास केवल एक रिश्ते का नाम नहीं, बल्कि मां का ही एक रूप होती है। जब रिश्तों को दिल से निभाया जाए, तो सेवा ही सबसे बड़ा धर्म बन जाती है।






