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यूपी कैबिनेट का बड़ा फैसला: आगरा, बरेली और प्रयागराज में नए शहरों के विकास को मंजूरी

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उत्तर प्रदेश सरकार ने शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत आगरा, बरेली और प्रयागराज में नए शहरों के समग्र एवं सुनियोजित विकास हेतु धनराशि स्वीकृत करने और व्यय संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, इस फैसले से प्रदेश में आधुनिक, सुव्यवस्थित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शहरी विकास को गति मिलने की उम्मीद है।

शहरी विकास योजना का उद्देश्य

प्रदेश सरकार तेजी से बढ़ती शहरी आबादी को ध्यान में रखते हुए नियोजित शहरी विकास और बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने पर काम कर रही है, इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना लागू की गई थी, इस योजना के तहत नए शहरों के विकास हेतु भूमि अर्जन पर होने वाले व्यय का 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार द्वारा सीड कैपिटल के रूप में अधिकतम 20 वर्षों के लिए उपलब्ध कराने का प्रावधान है, इससे विकास प्राधिकरणों और संबंधित एजेंसियों को बड़े पैमाने पर आधुनिक शहरी अवसंरचना विकसित करने में मदद मिलेगी।

बजट और वित्तीय प्रावधान

वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के लिए 3500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है, इसके तहत आगरा, बरेली और प्रयागराज में प्रस्तावित नए शहरों के विकास के लिए कुल 355.06 करोड़ रुपये तक की सीड कैपिटल अनुमन्य की गई है, इसमें से प्रथम किस्त के रूप में 225 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान करते हुए धनराशि अवमुक्त करने का निर्णय लिया गया है।

यूपी सेमीकंडक्टर नीति-2024 में संशोधन को मंजूरी

कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2024 में संशोधन को भी मंजूरी दी गई, यह निर्णय बदलते औद्योगिक परिदृश्य, निवेशकों की आवश्यकताओं और भारत सरकार के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

नीति में बदलाव का उद्देश्य

उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2024 को 19 जनवरी 2024 को अधिसूचित किया गया था, जो 5 वर्षों तक प्रभावी रहेगी, संशोधन के बाद नीति को और अधिक निवेशक-अनुकूल (investor friendly) बनाया जाएगा, जिससे राज्य में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में बड़े निवेश आकर्षित हो सकें, सरकार का मानना है कि इन बदलावों से प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।

प्रमुख प्रावधान

  • निवेशकों को परियोजना के वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने के बाद कम से कम 3 वर्षों तक संचालन बनाए रखने की अनिवार्यता
  • राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं
  • निवेश और उद्योग विकास को बढ़ावा देने पर जोर

इन दोनों महत्वपूर्ण निर्णयों से स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश सरकार एक ओर जहां आधुनिक शहरी विकास पर ध्यान दे रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य को तकनीकी और औद्योगिक हब बनाने की दिशा में भी तेजी से कदम बढ़ा रही है।