हिंदी सिनेमा का स्वर्णिम दौर कहे जाने वाले 1970 के दशक ने भारतीय संगीत को कई ऐसी अमर धुनें दीं, जो आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं। उस दौर के गीत सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं थे, बल्कि प्रेम, विरह, दर्द और उम्मीद जैसे भावों की अभिव्यक्ति का माध्यम भी थे। यही वजह है कि दशकों बाद भी उन गीतों का जादू बरकरार है।
ऐसे ही सदाबहार गीतों में एक नाम है—‘हाल क्या है दिलों का ना पूछो सनम’। वर्ष 1973 में रिलीज हुई फिल्म ‘अनोखी अदा’ का यह गीत आज भी प्रेमियों और संगीत प्रेमियों की पसंदीदा प्लेलिस्ट का हिस्सा बना हुआ है। इश्क के इजहार से लेकर बिछड़ने के दर्द तक, यह गीत हर भाव को खूबसूरती से बयां करता है।
जब संगीत ने छुआ था दिल का हर कोना
1973 का साल हिंदी सिनेमा के लिए कई मायनों में खास था। इसी दौर में एक ओर अमिताभ बच्चन ‘जंजीर’ के जरिए नए सितारे के रूप में उभर रहे थे, तो दूसरी ओर रोमांटिक फिल्मों और मधुर संगीत का दौर भी अपने शिखर पर था। इसी वर्ष रिलीज हुई फिल्म ‘अनोखी अदा’ ने अपनी कहानी और गीतों के दम पर दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई।फिल्म का गीत ‘हाल क्या है दिलों का ना पूछो सनम’ अपनी रिलीज के साथ ही लोकप्रिय हो गया था और समय के साथ इसकी लोकप्रियता और बढ़ती चली गई।
किशोर कुमार की आवाज ने बनाया अमर
करीब 5 मिनट 50 सेकेंड लंबे इस गीत को महान गायक किशोर कुमार ने अपनी मधुर आवाज दी थी। उनकी गायकी ने गीत के हर शब्द में भावनाओं की गहराई भर दी। गीत का संगीत मशहूर संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने तैयार किया था, जबकि इसके बोल प्रसिद्ध गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे।कव्वाली शैली में प्रस्तुत इस गीत में शायरी, संगीत और गायकी का ऐसा संगम देखने को मिलता है, जिसने इसे हिंदी सिनेमा के यादगार गीतों में शामिल कर दिया।
मजरूह सुल्तानपुरी के शब्दों का जादू
इस गीत की सबसे बड़ी ताकत इसके बोल माने जाते हैं। मजरूह सुल्तानपुरी ने प्रेम की भावनाओं और दिल की उलझनों को बेहद सादगी और खूबसूरती के साथ शब्दों में पिरोया।गीत की पंक्तियों में प्रेम, समर्पण और भावनात्मक संघर्ष का ऐसा चित्रण है, जो आज भी श्रोताओं को भावुक कर देता है। यही वजह है कि यह गीत केवल एक फिल्मी गाना नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों के प्रेमियों के लिए एक भावनात्मक अनुभव बन गया।
जीतेंद्र-रेखा की जोड़ी ने जीता था दिल
फिल्म में यह गीत अभिनेता जीतेंद्र पर फिल्माया गया था। वहीं रेखा के साथ उनकी केमिस्ट्री को दर्शकों ने खूब पसंद किया। फिल्म में विनोद खन्ना ने भी अहम भूमिका निभाई थी और उनके नकारात्मक किरदार को काफी सराहना मिली थी।मुख्य कलाकारों के अलावा फिल्म में पद्मा खन्ना, महमूद, जीवन, कन्हैयालाल और नजीर हुसैन जैसे दिग्गज कलाकार भी नजर आए थे।
रोमांस, ड्रामा और सस्पेंस का शानदार मिश्रण
निर्देशक और निर्माता कुंदन कुमार की इस फिल्म की कहानी दो दोस्तों और बिजनेस पार्टनर्स के रिश्तों, गलतफहमियों और भावनात्मक उतार-चढ़ाव के इर्द-गिर्द घूमती है। रोमांस, ड्रामा और सस्पेंस के मिश्रण ने फिल्म को दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना दिया था।रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 40 से 45 लाख रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर करीब 1.5 करोड़ रुपये का कारोबार किया था, जो उस दौर के हिसाब से बड़ी सफलता मानी जाती है।
50 साल बाद भी बरकरार है लोकप्रियता
रिलीज के पांच दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी ‘हाल क्या है दिलों का ना पूछो सनम’ का आकर्षण कम नहीं हुआ है। रेडियो, म्यूजिक प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर यह गीत आज भी उतना ही पसंद किया जाता है जितना अपनी रिलीज के समय था।
यही वजह है कि यह गीत हिंदी सिनेमा के उन कालजयी नग्मों में शामिल है, जो समय की सीमाओं को पार कर आज भी श्रोताओं के दिलों में अपनी खास जगह बनाए हुए हैं।






