नाम बड़े और दर्शन छोटे, या फिर विकास कहीं खो गया? राजा भैया की धरती, प्रमोद तिवारी का प्रभाव और सांसद शिवपाल सिंह पटेल की मौजूदगी के बावजूद आखिर प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश के सबसे गरीब जिलों में क्यों गिना जा रहा है? यह सवाल अब सियासी गलियारों से निकलकर जनता के बीच पहुंच चुका है।
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जिस धरती ने स्वतंत्रता सेनानियों, संतों और बड़े-बड़े नेताओं को जन्म दिया, वही प्रतापगढ़ आज गरीबी और पिछड़ेपन की चर्चा में क्यों है? प्रतापगढ़ को लेकर इन दिनों एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा का विषय बनी हुई है। समाजसेवी आनंद पांडेय ने वित्तीय वर्ष 2023-24 से जुड़ी रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया है कि कभी “बड़का जिला” कहलाने वाला प्रतापगढ़ आज उत्तर प्रदेश के सबसे गरीब जिलों में गिना जा रहा है। आनंद पांडेय ने कहा कि यह किसी एक नेता या दल पर सवाल नहीं, बल्कि आजादी के बाद से अब तक जिले का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी जनप्रतिनिधियों और पूरे समाज के लिए आत्ममंथन का विषय है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर प्रतापगढ़ में बड़े उद्योग क्यों नहीं लग पाए, निवेशक यहां क्यों नहीं आते और जिले के युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन क्यों करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अगर जिले के विकास की बात करना राजनीति है, तो वह ऐसी राजनीति करते रहेंगे। उनकी मांग है कि प्रतापगढ़ में उद्योग, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े निवेश हों, ताकि रोजगार बढ़े और जिले की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके। इसके साथ ही उन्होंने जनता, व्यापारियों, बुद्धिजीवियों और जनप्रतिनिधियों से दल और विचारधारा से ऊपर उठकर प्रतापगढ़ के विकास के लिए एकजुट होने की अपील की और कहा कि “प्रतापगढ़ की पहचान गरीबी नहीं, बल्कि विकास और समृद्धि होनी चाहिए।”






