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Ram Mandir Donation Controversy: राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर PMO सख्त, ट्रस्ट से मांगी रिपोर्ट; जांच का दायरा बढ़ा

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अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दानपात्र से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र राम मंदिर में वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों ने नया मोड़ ले लिया है। सूत्रों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।पीएमओ की सक्रियता के बाद मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों के बीच हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जांच और व्यापक हो सकती है।

अयोध्या पहुंचे नृपेंद्र मिश्र, हुई समीक्षा बैठक

मामले के बीच मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और ट्रस्ट सदस्य नृपेंद्र मिश्र अयोध्या पहुंचे। उन्होंने ट्रस्ट पदाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों के साथ लंबी समीक्षा बैठक की। बैठक में आंतरिक ऑडिट के दौरान सामने आई कथित अनियमितताओं और जांच की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट स्तर पर पूरे मामले की गंभीरता से समीक्षा की जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता की सच्चाई सामने लाई जा सके।

आंतरिक ऑडिट में सामने आईं कथित गड़बड़ियां

जानकारी के अनुसार, ट्रस्ट की आंतरिक जांच और ऑडिट प्रक्रिया के दौरान कुछ वित्तीय विसंगतियों के संकेत मिले हैं। इसके बाद जांच एजेंसियों ने दानपात्र प्रबंधन, नकदी रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच शुरू कर दी है।पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियां कुछ कर्मचारियों से पूछताछ भी कर रही हैं। दानपात्र में जमा होने वाली राशि, उसके रखरखाव और लेखा-जोखा से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है।

पूर्व लेखाधिकारी के आरोपों से बढ़ा विवाद

मामला उस समय और गंभीर हो गया जब ट्रस्ट के पूर्व लेखाधिकारी महिपाल सिंह ने कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि दानपात्र से नियमित रूप से बड़ी रकम गायब की जा रही थी।महिपाल सिंह का आरोप है कि जब उन्होंने कथित अनियमितताओं की शिकायत की तो उन्हें पद से हटा दिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास कुछ दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद थे और बाद में संबंधित रिकॉर्ड तथा सीसीटीवी फुटेज को हटाने की कोशिश की गई।हालांकि, इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियां सभी तथ्यों की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही हैं।

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श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है मामला

राम मंदिर केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में दान और चढ़ावे से जुड़ी किसी भी प्रकार की अनियमितता का आरोप स्वाभाविक रूप से लोगों की चिंता बढ़ा रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच से ही श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी हुईं तेज

मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है।उन्होंने कहा कि आस्था से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

अब जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं निगाहें

पीएमओ द्वारा रिपोर्ट मांगे जाने के बाद अब पूरे देश की नजर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और अधिकारियों के निष्कर्ष इस मामले की दिशा तय कर सकते हैं।फिलहाल जांच जारी है और आधिकारिक तौर पर किसी व्यक्ति की भूमिका या दोष तय नहीं किया गया है। ऐसे में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।