उत्तर प्रदेश में बिजली की बढ़ी हुई कीमतों को लेकर अब सरकार के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं। फ्यूल सरचार्ज के नाम पर बिजली दरों में 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी के आदेश के बाद प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने यूपी पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के चेयरमैन आशीष गोयल से कड़े सवाल पूछे हैं। मंत्री ने साफ तौर पर पूछा है कि आखिर उनकी जानकारी और अनुमति के बिना बिजली दरों में वृद्धि का फैसला कैसे लिया गया।इस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। माना जा रहा है कि ऊर्जा विभाग के शीर्ष स्तर पर सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा है।
ऊर्जा मंत्री ने लिखी सख्त चिट्ठी
सूत्रों के अनुसार ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने 2 जून को UPPCL चेयरमैन आशीष गोयल को एक पत्र भेजकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए। मंत्री ने पूछा कि फ्यूल सरचार्ज के जरिए बिजली बिल बढ़ाने का आदेश जारी करने से पहले उनसे कोई चर्चा क्यों नहीं की गई।पत्र में मंत्री ने यह भी कहा कि उन्हें बिजली दरों में वृद्धि की जानकारी टीवी न्यूज चैनलों के माध्यम से मिली। उन्होंने नाराजगी जताते हुए पूछा कि क्या विभागीय निर्णय लेने से पहले मंत्री को विश्वास में लेना आवश्यक नहीं समझा गया?
“मेरे विभाग के फैसले मुझे टीवी से पता चलते हैं”
ऊर्जा मंत्री ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी उन्हें मीडिया के माध्यम से मिल रही है। उन्होंने UPPCL चेयरमैन पर बिना सूचना मुख्यालय से अनुपस्थित रहने का आरोप भी लगाया।मंत्री के इस रुख से साफ संकेत मिल रहे हैं कि ऊर्जा विभाग और UPPCL प्रशासन के बीच समन्वय को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज बढ़ने पर विवाद
दरअसल हाल ही में उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं पर फ्यूल सरचार्ज का अतिरिक्त भार डाला गया था। इस फैसले के तहत बिजली बिलों में लगभग 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की बात सामने आई थी।इस निर्णय के बाद आम उपभोक्ताओं में पहले ही नाराजगी थी, लेकिन अब खुद ऊर्जा मंत्री द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया है।
बिजली संकट के बीच बढ़ी थी नाराजगी
पिछले महीने उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड बिजली खपत दर्ज की गई थी। प्रदेश में बिजली की मांग 32,000 मेगावाट के करीब पहुंच गई थी। कई जिलों से लगातार बिजली कटौती की शिकायतें सामने आ रही थीं।स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा को स्वयं हस्तक्षेप कर हालात की समीक्षा करनी पड़ी थी। इसके बाद बिजली आपूर्ति व्यवस्था को सुधारने के प्रयास किए गए।
विभाग के अंदर टकराव के संकेत
ऊर्जा मंत्री और UPPCL चेयरमैन के बीच सामने आई इस चिट्ठी ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि बिजली दरों में वृद्धि, कर्मचारियों की छंटनी और विभागीय फैसलों को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं।हालांकि अभी तक UPPCL चेयरमैन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
क्या पड़ेगा आम जनता पर असर?
बिजली दरों में बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। यदि फ्यूल सरचार्ज लागू रहता है तो उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में अतिरिक्त बोझ देखने को मिल सकता है।अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इस विवाद पर क्या रुख अपनाती है और बिजली दरों को लेकर आगे क्या फैसला लिया जाता है।






