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राम मंदिर दान निधि विवाद: 7 करोड़ रुपये के कथित गबन की जांच के लिए SIT गठित

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अयोध्या के भव्य राम मंदिर की दान निधि को लेकर उठे कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। करीब 7 करोड़ रुपये के कथित गबन के आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।

जांच समिति में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी एस. किरण और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है। सरकार ने एसआईटी को सात दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब अयोध्या के रुदौली क्षेत्र में एक मंदिर कर्मचारी के घर से कथित तौर पर 10 से 12 लाख रुपये नकद बरामद होने की जानकारी सामने आई। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां उन कर्मचारियों से पूछताछ कर रही हैं जो मंदिर में प्राप्त दान की गिनती और संबंधित कार्यों से जुड़े हुए थे।

जांच के दौरान कुछ कर्मचारियों की संपत्तियों को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। बताया जा रहा है कि 18 से 20 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले कुछ कर्मचारियों ने हाल के वर्षों में करोड़ों रुपये मूल्य की संपत्तियां खरीदी हैं। इनमें एक कर्मचारी द्वारा लगभग 1.5 करोड़ रुपये की जमीन और दूसरे द्वारा करीब 40 लाख रुपये का प्लॉट खरीदने की जानकारी सामने आई है। इन तथ्यों के बाद जांच एजेंसियों का संदेह और गहरा गया है।

विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष ने दान राशि में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं, जबकि सरकार ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का भरोसा दिलाया है।

फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई एसआईटी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आ सकेगी। जांच के नतीजे यह तय करेंगे कि लगाए गए आरोपों में कितना दम है और क्या वास्तव में दान निधि में किसी तरह की वित्तीय अनियमितता हुई है।

राम मंदिर से जुड़ा यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है और श्रद्धालुओं समेत सभी की निगाहें अब जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।