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संयुक्त राष्ट्र में भारत ने उठाया विकास का मुद्दा, राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को सर्वोच्च महत्व देने की वकालत

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न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में भारत ने एक बार फिर वैश्विक विकास एजेंडे को लेकर अपनी स्पष्ट और मजबूत सोच दुनिया के सामने रखी है। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ECOSOC) के सत्र के दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने विकास को संयुक्त राष्ट्र का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए सदस्य देशों की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और आवश्यकताओं को विकास योजनाओं के केंद्र में रखने पर जोर दिया।इस अवसर पर राजदूत पी. हरीश ने संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव एवं सतत विकास समूह (UN Sustainable Development Group) की अध्यक्ष अमीना जे. मोहम्मद के साथ एक उच्चस्तरीय संवाद में भी भाग लिया।

विकास संयुक्त राष्ट्र की सर्वोच्च प्राथमिकता: भारत

बैठक के दौरान भारत ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र के तीन प्रमुख स्तंभों—शांति, सुरक्षा और विकास—में विकास की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसकी प्राथमिकता किसी भी परिस्थिति में कम नहीं होनी चाहिए।राजदूत पी. हरीश ने कहा कि विकास केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि संयुक्त राष्ट्र के मूल उद्देश्यों में से एक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक स्तर पर तैयार की जाने वाली विकास नीतियां सदस्य देशों की वास्तविक जरूरतों, राष्ट्रीय लक्ष्यों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप होनी चाहिए।

राष्ट्रीय स्वामित्व को विकास का आधार बनाने की मांग

भारत ने वार्ता के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया कि किसी भी विकास कार्यक्रम की सफलता तभी सुनिश्चित हो सकती है जब उसमें संबंधित देश का ‘राष्ट्रीय स्वामित्व’ (National Ownership) हो।भारत का मानना है कि विकास परियोजनाओं और नीतियों को लागू करते समय स्थानीय संस्कृति, सामाजिक परिस्थितियों और क्षेत्रीय आवश्यकताओं का सम्मान किया जाना चाहिए। इससे विकास के प्रयास अधिक प्रभावी और टिकाऊ बन सकेंगे।

रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर प्रणाली को मजबूत बनाने पर जोर

बैठक के बाद सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए राजदूत पी. हरीश ने कहा कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र के विकास स्तंभ की प्रधानता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।उन्होंने कहा कि रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर प्रणाली (Resident Coordinator System) में भविष्य में किए जाने वाले किसी भी सुधार या पुनर्समायोजन का उद्देश्य सदस्य देशों को मिलने वाले विकास कार्यक्रमों के समर्थन को और अधिक प्रभावी बनाना होना चाहिए।भारत ने यह भी कहा कि इस प्रणाली को मजबूत बनाकर विकास संबंधी कार्यक्रमों की पहुंच और प्रभावशीलता को बढ़ाया जा सकता है।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर भारत का विशेष जोर

राजदूत हरीश ने कहा कि रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर प्रणाली के भविष्य के वित्तपोषण और प्रशासनिक ढांचे को लेकर अभी चर्चा जारी है। ऐसे में भारत ने इस व्यवस्था में पारदर्शिता (Transparency), जवाबदेही (Accountability) और इसके वास्तविक विकास प्रभावों के व्यापक मूल्यांकन की आवश्यकता को प्रमुखता से उठाया।भारत का मानना है कि विकास कार्यक्रमों के बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के लिए उनके प्रभाव का नियमित और निष्पक्ष मूल्यांकन होना चाहिए।

सतत विकास लक्ष्यों को लेकर भारत की प्रतिबद्धता

भारत लगातार संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को आगे बढ़ाने और विकासशील देशों की जरूरतों को वैश्विक मंच पर प्रमुखता से उठाने का पक्षधर रहा है। ईकोसॉक सत्र में भारत की यह पहल विकास एजेंडे को मजबूत करने और सदस्य देशों की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।