क्या अब देश में कुर्सी भी जाति देखकर मिलेगी? क्या एक सांसद को सिर्फ इसलिए पहली पंक्ति में बैठने से रोक दिया गया क्योंकि वह ब्राह्मण थीं? अगर यह आरोप सही है, तो यह सिर्फ एक नेता का नहीं बल्कि देश की राजनीति पर बड़ा सवाल है। अब आप सोचिये जिस ब्राह्मण का यूपी बीजेपी बटुक सम्मान कर रही है वही दूसरी तरफ महाराष्ट्र में ब्राहणा सांसद को कुर्सी पर बैठने तक नहीं दिया गया, महाराष्ट्र से सामने आई इस घटना ने बीजेपी के भीतर भी नई बहस छेड़ दी है।
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आखिर पूरा मामला क्या है, आइए जानते हैं।”महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित एक सम्मान समारोह के दौरान बीजेपी की राज्यसभा सांसद मेधा कुलकर्णी ने अपनी ही पार्टी के विधायक अभिमन्यु पवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मेधा कुलकर्णी का दावा है कि उन्हें कार्यक्रम की पहली पंक्ति में बैठने से यह कहते हुए रोक दिया गया कि यह मराठा समुदाय का कार्यक्रम है और अगर वह आगे बैठेंगी तो विवाद हो सकता है क्योंकि वह ब्राह्मण हैं। उस समय कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद थे।मेधा कुलकर्णी के अनुसार, इस व्यवहार से आहत होकर उन्होंने कार्यक्रम बीच में ही छोड़ दिया। इस घटना के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
एक पक्ष इसे ब्राह्मण समाज के सम्मान से जोड़कर देख रहा है, जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सभी पक्षों की बात सामने आनी चाहिए।हालाँकि अब इस पूरे मामले को लेकर देशभर में बवाल मच गया है और यह बड़ा विवाद बनता हुआ जा रहा है ,लोग इसे ब्राह्मण सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं हालांकि कुछ लोग सवाल भी उठा रहे हैं कि यही ब्राह्मण नेता आज जब इनका अपमान हो रहा है तो ब्राह्मण की बात कर रहे हैं वरना जब UGC आया था तब यह लोग बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के साथ यानिकि मोदी और शाह के पीछे खड़े हुए नजर आ रहे फिलहाल इस आरोप को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज है और यह मुद्दा सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना होगा कि बीजेपी इस पूरे विवाद पर क्या आधिकारिक रुख अपनाती है और क्या इस मामले में कोई स्पष्टीकरण या कार्रवाई सामने आती है।






